राजनीति

सीएए के बाद पहली बार वोट डालकर भावुक हुए पाक विस्थापित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सीएए के बाद पहली बार वोट डालकर भावुक हुए पाक विस्थापित

जोधपुर के नयापुरा चौखा क्षेत्र में पहली बार वोट डालने पहुंचे पाक विस्थापित नागरिकों की स्याही लगी उंगलियां उनके लिए केवल मतदान का निशान नहीं, बल्कि नई पहचान, उम्मीद और लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रतीक बन गईं।

28 अक्टूबर, जोधपुर। राजस्थान के पंचायती राज चुनावों के दौरान जोधपुर में लोकतंत्र की एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई। पाकिस्तान से प्रताड़ना और अनिश्चितताओं का सामना कर भारत आए तथा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले विस्थापित परिवारों के सदस्यों ने पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वर्षों तक मतदान के अधिकार से वंचित रहे इन लोगों के लिए यह पल केवल वोट डालने तक सीमित नहीं था, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में अपनी भागीदारी, पहचान और सम्मान का एहसास कराने वाला ऐतिहासिक अवसर बन गया।

जोधपुर के नयापुरा चौखा क्षेत्र में जब ये नए भारतीय नागरिक मतदान केंद्रों पर पहुंचे और कतार में खड़े होकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, तो उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। पहली बार वोट डालने का उत्साह और आंखों में छलकती खुशी इस बात का एहसास करा रही थी कि नागरिकता मिलने के बाद उनके जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

पहली बार वोट डालकर छलकी खुशी पाकिस्तान से विस्थापित होकर जोधपुर में रह रहे डॉ. दलजीराम, डॉ. नत्थूराम, रमेश कुमार, धनु राम और प्रीतम जयपाल सहित कई लोगों ने पहली बार मतदान किया। वोट डालने के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उनके लिए यह दिन बेहद खास है। उनके अनुसार, पाकिस्तान में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों और असुरक्षाओं का सामना करना पड़ा। भारत आने के बाद नागरिकता मिलने से अब उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी आवाज उठाने और अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला है।

इन नागरिकों का कहना है कि मतदान का अधिकार मिलने से उन्हें अपने भारतीय होने पर गर्व महसूस हो रहा है। अब वे भी लोकतंत्र की प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अपने क्षेत्र के विकास और स्थानीय समस्याओं के समाधान में भूमिका निभा सकते हैं।

'अब हम गर्व से कह सकते हैं कि हम भारतीय हैं'

पहली बार मतदान करने वाले विस्थापित नागरिकों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिला।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह केवल एक वोट डालने का अधिकार नहीं है, बल्कि अपने हक की बात रखने, जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने और क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाने की ताकत भी है। उनके मुताबिक, अब वे अपने आपको गर्व के साथ भारतीय नागरिक कह सकते हैं और लोकतंत्र में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

CAA के बाद नई उम्मीदें, अब बुनियादी सुविधाओं की आस

पहली बार मतदाता बने इन परिवारों के चेहरों पर जहां नागरिकता और मतदान के अधिकार की खुशी नजर आई, वहीं उनके मन में अपनी बस्तियों की समस्याओं के समाधान की उम्मीदें भी हैं। विस्थापित परिवारों का कहना है कि नागरिकता मिलने के बाद अब वे चाहते हैं कि उनके रहवास वाले क्षेत्रों का भी समुचित विकास हो। इन नागरिकों का कहना है कि मतदान के जरिए उन्होंने अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाई है और अब उन्हें जनप्रतिनिधियों से विकास कार्यों की उम्मीद है।

जनप्रतिनिधियों से विकास की उम्मीद विस्थापित परिवारों के लिए पहली बार वोट डालना एक नई शुरुआत है। वे चाहते हैं कि उनकी बस्तियों में रहने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। पक्के आवासीय पट्टे, बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल, नियमित बिजली और सीवरेज व्यवस्था जैसी जरूरतें उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं। मतदान के बाद इन परिवारों की उम्मीदें स्थानीय प्रशासन और चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों से जुड़ गई हैं। अब वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से अपनी समस्याओं को सामने रखने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपेक्षा कर रहे हैं।

लोकतंत्र में भागीदारी का यादगार दिन पाकिस्तान में बिताए कठिन दौर और विस्थापन की चुनौतियों को पीछे छोड़कर भारत आए इन लोगों के लिए पहली बार मतदान करना जीवन का यादगार अनुभव बन गया। मतदान के बाद उनकी खुशी ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में भागीदारी का अधिकार किसी भी नागरिक के लिए कितना महत्वपूर्ण है। जोधपुर के नयापुरा चौखा क्षेत्र में पहली बार वोट डालने पहुंचे इन विस्थापित नागरिकों की स्याही लगी उंगलियां उनके लिए केवल मतदान का निशान नहीं, बल्कि नई पहचान, उम्मीद और लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रतीक बन गईं।

बाइट

डॉ. दलजीराम, पाक विस्थापित डॉ. नत्थूराम, पाक विस्थापित

रमेश कुमार, पाक विस्थापित धनु राम, पाक विस्थापित

प्रीतम जयपाल, पाक विस्थापित

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।