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सिंदूर, काला जादू और सुपारी: एक माँ की हत्या की कहानी, संपत्ति के लालच ने कैसे उजाड़ा एक परिवार

लेखक: admin अंतिम अपडेट: 14 अगस्त 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
सिंदूर, काला जादू और सुपारी: एक माँ की हत्या की कहानी, संपत्ति के लालच ने कैसे उजाड़ा एक परिवार

पिछले कुछ महीनों से 45 वर्षीय नीरज शर्मा किसी अनजान खौफ के साये में जी रही थीं। घर पर पत्थर फेंके जाने की घटनाएँ, गली में मंडराते अजनबी चेहरे, और यह लगातार अहसास कि कोई उन पर नज़र रख रहा है — यह सब पिछले कुछ महीनों की रोज़मर्रा बन चुका था। करीब तीन महीने पहले एक तेज़ रफ्तार थार गाड़ी ने उन्हें कुचलने की कोशिश की थी, लेकिन वे बाल-बाल बच गई थीं। इसके बाद घर के बाहर सिंदूर, नारियल, काली गुड़िया और जले हुए कपड़े जैसी चीज़ें मिलनी शुरू हुईं — ऐसी चीज़ें जिन्हें आमतौर पर काला जादू या टोना-टोटका माना जाता है।

नीरज ने इन सारी घटनाओं को रिकॉर्ड किया और अपने भाई राकेश शर्मा को इसकी जानकारी दी। एहतियातन घर पर सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए गए। लेकिन बेटे आर्यन की फिजियोथेरेपी के लिए हर दिन घर से बाहर निकलना उनकी मजबूरी थी — और यही मजबूरी आखिरकार उनकी जान ले बैठी।

हादसा या सुनियोजित हत्या?

3 जुलाई 2026 की शाम, फिजियोथेरेपी सेंटर से लौटते वक्त नीरज को एक फोन कॉल आया। कुछ ही देर बाद सड़क पर करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आई एक स्कॉर्पियो गाड़ी ने उन्हें बुरी तरह टक्कर मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

शुरुआत में इसे एक सामान्य हिट-एंड-रन मामला मानकर दर्ज किया गया। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी, परिवार के भीतर छिपा एक गहरा प्रॉपर्टी विवाद और एक सुनियोजित साज़िश सामने आने लगी।

टूटता परिवार, बढ़ती दूरियां

नीरज के पति विजय वशिष्ठ को दिसंबर 2024 में ब्रेन हैमरेज हुआ था। इसी दौर में माँ नीरज और बेटी आयुषी के रिश्तों में खटास आनी शुरू हुई — आयुषी को शिकायत थी कि माँ का ध्यान भाई आर्यन पर ज़्यादा रहता है। पिता की बिगड़ती हालत के बीच आयुषी उन्हें अपने साथ कहीं ले गई और महीनों तक परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी। बाद में पता चला कि उनकी हालत बेहद नाज़ुक हो चुकी थी, और आखिरकार उनकी मृत्यु हो गई।

विजय की सरकारी नौकरी के लिए परिवार में नीरज और आयुषी, दोनों पात्र थीं। मामा की सलाह पर आखिरकार यह नौकरी नीरज को दी गई, ताकि परिवार का गुज़ारा चल सके — लेकिन यही फैसला आगे चलकर पारिवारिक कलह की जड़ बन गया।

लालच की साज़िश

नौकरी और प्रॉपर्टी नीरज के नाम आने के बाद, आरोप है कि आयुषी का लालच बढ़ता गया। वह घर छोड़कर अपने ताऊ मोहन स्वरूप के बेटे बलराम के साथ रहने लगी। पुलिस जांच के अनुसार, ताऊ की नज़र काफी समय से नीरज की करोड़ों की संपत्ति पर थी, और उन्होंने कथित तौर पर आयुषी को यह कहकर भड़काया कि जब तक नीरज जीवित हैं, न नौकरी उसे मिलेगी और न ही संपत्ति।

जांच में सामने आया कि इसी साज़िश के तहत नीरज को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। 1 मार्च 2026 को बलराम ने कथित तौर पर घर में मारपीट की, जिसकी शिकायत नीरज ने पुलिस में दर्ज कराई, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस के अनुसार, इसके बाद नीरज की हत्या के लिए करीब 7 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी।

डर का माहौल और आखिरी वार

पहला हमला — थार गाड़ी वाला — नाकाम रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, इसके बाद घर के इर्द-गिर्द डर का माहौल बनाने के लिए नींबू-मिर्ची टोटकों और काले जादू जैसी चीज़ों का सहारा लिया गया, ताकि परिवार भ्रम में रहे और असली साज़िश पर किसी का शक न जाए।

आखिरकार 3 जुलाई को आरोप है कि आयुषी ने ही फोन कर माँ को घर बुलाया और तय योजना के तहत स्कॉर्पियो से कुचलवा दिया गया।

पर्दाफाश

घटना के बाद आयुषी के मामा संतोष शर्मा ने पुलिस को बताया कि आयुषी और उसके कज़िन बलराम के बीच नाजायज़ संबंध थे, और संपत्ति के लालच में इसी रिश्ते की वजह से पिता और माँ, दोनों की मौत का रास्ता तैयार हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। पूछताछ में शुरुआत में आयुषी अकड़ दिखाती रही, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उसका आत्मविश्वास टूट गया।

एक चेतावनी जो अनसुनी रह गई

सबसे तकलीफदेह पहलू यह है कि नीरज ने खतरे को पहले ही भांप लिया था — उन्होंने सबूत जुटाए, परिवार को आगाह किया, पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन समय रहते सुरक्षा न मिल पाने की वजह से आखिरकार उन्होंने अपनी जान गंवा दी।

यह मामला सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि माँ-बेटी के उस रिश्ते के कलंकित होने की कहानी है, जिसे लालच और साज़िश ने बर्बाद कर दिया।

(नोट: कुछ आरोप अभी पुलिस जांच और परिजनों के बयानों पर आधारित हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।)

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