SIR में छूटे मतदाताओं को एक और मौका:दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 7 राज्यों के वोटर फिर नाम जुड़वा सकेंगे; 8 दिन में दूसरा बड़ा फैसला
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
चुनाव आयोग (EC) ने SIR प्रक्रिया के दौरान छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने एक और मौका देने का फैसला किया। यह मौका उन मतदाताओं को मिलेगा, जिन्हें एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट (ASDD) के तौर पर रखा गया था। इन मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जारी हुए थे, लेकिन वापस नहीं मिले। इसके चलते स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उनका नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में शामिल नहीं हो सका।
आयोग के निर्देश दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नगालैंड पर लागू होंगे। इस दौरान डुप्लिकेट नामांकन रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, जो लोग कभी वोटर लिस्ट में थे ही नहीं, उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा। ये सिर्फ उन्हीं के लिए है जो पहले से लिस्ट में थे, लेकिन SIR के दौरान उनके नाम कट गए।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दिल्ली में की गई जल्दबाजी पर सवाल उठाया था, अगले ही दिन आयोग ने तारीख बढ़ा दी थी। दिल्ली में SIR से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 97.53 लाख नाम शामिल किए गए। इस तरह लगभग 47.57 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर रहे।
इसका मतलब क्या है और यह जरूरी क्यों अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है और आपको ASDD बताया गया है, तो घबराएं नहीं। BLO आपके घर फिर आएगा या आप दावा-आपत्ति के दौरान फॉर्म भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इसके लिए आपको अपना आधार, वोटर आईडी और पते का प्रूफ रखना होगा। बिहार में SIR के दौरान लाखों नाम कटने पर विपक्ष ने हंगामा किया था।
अब 7 राज्यों में उसी तरह की शिकायतें आ रही थीं कि जिंदा लोगों को मृत बता दिया गया, जो बाहर गए हैं उन्हें गैरमौजूद बता दिया गया। आयोग का ये फैसला उन शिकायतों के बाद आया है। इतना ही नहीं, राज्य के भीतर पता बदलने वालों को फॉर्म-8 की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा जिनका पता नहीं बदला, उन्हें पहले फॉर्म न देने का कारण बताना होगा।
पता बदलने वालों को नए पते का प्रमाण देना होगा। बेघरों के लिए बीएलओ की रिपोर्ट मान्य होगी। परिजन या ऑनलाइन भी फॉर्म जमा होंगे। पहले फॉर्म-6 भर चुके लोगों को दोबारा गणना फॉर्म नहीं देना होगा। जांच के बाद नाम जुड़ने पर पुराना वोटर आईडी नंबर ही रहेगा। चुनाव आयोग का 3 दिन में दूसरा अहम फैसला इससे पहले 3 नवंबर को आयोग ने एक और फैसला लिया था, जिसमें कहा गया थ
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar