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SIR विवाद पर 2000 नागरिकों का CJI को लेटर:स्वत: संज्ञान लेने की मांग की; चुनाव आयोग अब तक 9 नियम बदल चुका

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
SIR विवाद पर 2000 नागरिकों का CJI को लेटर:स्वत: संज्ञान लेने की मांग की; चुनाव आयोग अब तक 9 नियम बदल चुका

देश के 2 हजार से ज्यादा नागरिकों ने भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत को लेटर लिखकर SIR पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही निर्वाचन आयोग की भूमिका पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करने की अपील की है। लेटर में कहा गया है- SIR की वैधता, प्रक्रिया की समीक्षा होने तक इसे रोकें। वोटर रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित अनधिकृत बदलावों की कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई और ईसीआईनेट का सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से सिक्योरिटी और लीगल ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। लेटर पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व आईएएस अधिकारी अदिति मेहता, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज सहित शिक्षाविद, वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक दिन पहले 9 फैसले लिए चुनाव आयोग ने शनिवार की बैठक में अपने कामकाज और चुनावी व्यवस्था से जुड़े 9 फैसले लिए। आयोग ने कहा कि बैठकों से पहले एजेंडा साझा किया जाएगा और बाद में फैसलों का रिकॉर्ड तैयार होगा। नए IT मॉड्यूल और पोर्टल को लागू करने से पहले उनकी समीक्षा भी की जाएगी।

आयोग की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। अंदरूनी मतभेद के दावों के बीच आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले सर्वसम्मत से हुए थे। दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।

आयोग ने बैठक के बाद इन दावों पर भी अपनी बात रखी। आयोग का दावा- संधू-जोशी ने प्रतिनियुक्त अधिकारी के आदेश पर आपत्ति जताई थी आयोग ने शनिवार को प्रेस रीलिज जारी कर बताया कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी से जुड़े थे। इंडियन एक्सप्रेस का दावा था कि संधू और जोशी ने उस आदेश पर आपत्ति जताई थी, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की शक्ति केंद्रीय स्तर पर सिमटने की आशंका

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

सुपर इलेक्शन इंफॉर्मेशन रजिस्ट्रेशन (SIR) के तहत, मतदाता पंजीकरण और मतदान प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया गया है। यह कदम चुनावी पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए उठाया गया था। अब 2000 से अधिक नागरिकों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर SIR पर रोक लगाने की मांग की है, क्योंकि उन्हें लगता है कि सॉफ्टवेयर और फॉर्म में अनधिकृत बदलाव हुए हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव आयोग की नीतियों पर सार्वजनिक विश्वास को चुनौती देती है और न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाती है। यदि SIR को रोका गया, तो चुनावी प्र

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