स्पेन में कुष्ठ रोग पर शोध प्रस्तुत करेंगे एम्स भोपाल के दो युवा शोधकर्ता
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मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग (माइक्रोबायोलॉजी) के दो युवा शोधकर्ता, डॉ. भव्या शारदा (जूनियर रेजिडेंट) और सुश्री शैना गायकवाड़ (पीएचडी स्कॉलर), स्पेन के मैड्रिड में आयोजित 21वीं अंतरराष्ट्रीय संक्रामक रोग कांग्रेस (आईसीआईडी 2026) में कुष्ठ रोग पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
• भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दोनों शोधकर्ताओं को इसके लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अनुदान स्वीकृत किया है।
• शोध पत्र नॉन-ट्यूबरकुलस माइकोबैक्टीरिया और माइकोबैक्टीरियम लेप्री (कुष्ठ रोग का कारक जीवाणु) पर केंद्रित है। यह शोध विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार मौर्य के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
• यह कांग्रेस इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर इन्फेक्शियस डिजीजेज (आईएसआईडी) द्वारा 10 से 13 नवंबर 2026 तक आयोजित की जा रही है।
कुष्ठ रोग के इलाज के संदर्भ में एम्स भोपाल के दो युवा शोधकर्ता स्पेन के मैड्रिड में 21वीं अंतरराष्ट्रीय संक्रामक रोग कांग्रेस (आईसीआईडी 2026) में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इसके लिये एम्स भोपाल के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग (माइक्रोबायोलॉजी) के डॉ. भव्या शारदा (जूनियर रेजिडेंट) और सुश्री शैना गायकवाड़ (पीएचडी स्कॉलर) को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा अंतरराष्ट्रीय यात्रा अनुदान स्वीकृत किया गया है।
इन युवा शोधकर्ताओं द्वारा नॉन-ट्यूबरकुलस माइकोबैक्टीरिया (क्षय रोग के जीवाणु से भिन्न माइकोबैक्टीरिया समूह) और माइकोबैक्टीरियम लेप्री (कुष्ठ रोग का कारक जीवाणु) पर केंद्रित शोध पत्र लिखा गया है। माइकोबैक्टीरियम लेप्री वह जीवाणु है, जिससे कुष्ठ रोग होता है। यह शोध एम्स भोपाल के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ.
आनंद कुमार मौर्य के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह अंतरार्ष्ट्रीय कांग्रेस इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर इन्फेक्शियस डिजीजेज (आईएसआईडी) द्वारा आयोजित की जा रही है। यह 21वीं अंतरराष्ट्रीय संक्रामक रोग कांग्रेस (आईसीआईडी 2026) 10 से 13 नवंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी।
संक्रामक रोग आज भी आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों पर किया गया शोध उनकी बेहतर समझ और भविष्य में उनसे निपटने के प्रभावी तरीके विकसित करने में सहायक हो सकता है। यह उपलब्धि संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने, युवा शोधकर्ताओं को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इतने प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने से एम्स भोपाल के शोध को दुनियाभर के वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। साथ ही संक्रामक रोगों के क्षेत्र में भविष्य के सहयोग के रास्ते भी खुलेंगे।