ST से DSP और फिर OBC से जिला पंचायत सदस्य...:पुलिस अधिकारी से पहले सरकारी टीचर भी रहे; कब-कब पूर्व IPS ने बदली जाति
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →भोपाल/गुना। करीब चार दशक तक पुलिस सेवा में रहे पूर्व IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीना अब जाति प्रमाण पत्र को लेकर चर्चा में हैं। पुलिस मुख्यालय भोपाल की सतर्कता शाखा ने उनके खिलाफ फ्रॉड, आपराधिक षड्यंत्र समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने ST वर्ग का जाति प्रमाण पत्र हासिल कर MPPSC की परीक्षा दी और इसी के आधार पर DSP की नौकरी प्राप्त की।
शिकायत के अनुसार, इससे पहले वे OBC वर्ग के प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी शिक्षक बने थे। वहीं रिटायरमेंट के बाद 2022 में उन्होंने OBC आरक्षित सीट से जिला पंचायत का चुनाव लड़ा। मामले में अब सवाल उनके अलग-अलग समय पर इस्तेमाल किए गए जाति प्रमाण पत्रों की वैधता और उनके आधार पर मिले लाभों को लेकर उठ रहे हैं।
चांचौड़ा के अजगरी गांव से सरकारी सेवा तक रघुवीर सिंह मीना मूल रूप से गुना जिले के चांचौड़ा क्षेत्र के अजगरी गांव के रहने वाले हैं। सरकारी सेवा में आने से पहले उन्होंने शिक्षक के रूप में काम किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने OBC वर्ग के आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की थी।
चांचौड़ा क्षेत्र के ग्राम चित्तोड़ा के शासकीय स्कूल में उन्होंने सेवाएं दीं। 1984: ST प्रमाण पत्र से MPPSC और DSP पद आरोप है कि वर्ष 1984 में रघुवीर सिंह मीना ने विदिशा जिले का मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके बाद सिरोंज से ST वर्ग का जाति प्रमाण पत्र हासिल किया। बताया गया है कि विदिशा जिले की सिरोंज तहसील में मीना समाज ST वर्ग में आता है।
इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने MPPSC की परीक्षा दी और DSP पद पर चयनित हुए। अब जांच का प्रमुख सवाल यही है कि ST प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी हुआ और क्या उसके जरिए MPPSC में आरक्षण का लाभ लेना नियमों के अनुरूप था। DSP से IPS तक का सफर 1984 में जारी ST प्रमाण-पत्र समिति ने अमान्य घोषित किया इस मामले की शिकायत राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी ने वर्ष 2016 में रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ की थी।
आरोप लगाया गया कि DSP की नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने विदिशा के सिरोंज से ST प्रमाणपत्र बनवाया और उसे MPPSC परीक्षा में इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप था कि इसी प्रमाणपत्र के आधार पर बाद में उन्हें प्रमोशन और अन्य सरकारी लाभ मिले। इसके बाद प्रकरण मध्यप्रदेश शासन की अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाणपत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति, भोपाल के पास पहुंचा।
समिति ने संबंधित प्रमाणपत्र से जुड़े अभिलेखों और उपलब्ध तथ्यों की जांच की। जांच में सामने आया कि विदिशा के क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 1984 में रघुवीर सिंह मीना के पक्ष में अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया था। समिति ने इस प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया है।
वहीं, अभिलेखों में उनके मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। समिति की जांच में प्रमाणपत्र हासिल करने और उसके आधार पर MPPSC परीक्षा देने में अनियमितता पाए जाने की बात कही गई। इसी जांच के आधार पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने 18 सितंबर को रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ FIR दर्ज की।
FIR में फ्रॉड, आपराधिक षड्यंत्र समेत अन्य धाराएं लगाई गई हैं। 2021 में रिटायरमेंट, 2022 में OBC सीट से चुनाव रघुवीर सिंह मीना वर्ष 2021 में पुलिस सेवा से रिटायर हुए। इसके अगले साल 2022 में उन्होंने जिला पंचायत के वार्ड नंबर 16 से चुनाव लड़ा। यह सीट OBC वर्ग के लिए आरक्षित थी। आरोप है कि चुनाव के लिए उन्होंने चांचौड़ा से OBC वर्ग का प्रमाण पत्र बनवाया।
चुनावी शपथ पत्र में भी उनकी जाति OBC दर्ज होने की बात सामने आई है। वे चुनाव जीतकर जिला पंचायत सदस्य बने। यही दस्तावेज अब मामले की अहम कड़ी है। एक ओर 1984 में पुलिस सेवा में प्रवेश के लिए इस्तेमाल किया गया ST प्रमाण पत्र और दूसरी ओर 2022 में OBC आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया OBC प्रमाण पत्र।
परिवार का राजनीतिक सफर अब किन बिंदुओं पर जांच?
जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत के बाद करीब चार दशक पुराने रिकॉर्ड फिर जांच के दायरे में हैं। जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को देखा जा रहा है...
पत्नी ममता मीना बोलीं- शुरू से झेल रहे FIR के बाद शनिवार को रघुवीर सिंह मीना की पत्नी और पूर्व विधायक ममता मीना ने एक वीडियो जारी कर पूरे मामले पर अपनी बात रखी। वीडियो में उन्होंने कहा झांसी की रानी अंग्रेजों से लड़ी थीं। उन अंग्रेजों के मित्रों से हम लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा पहले भी बहुत लोगों के द्वारा इसे झेला है और आपने जो यह करा दिया है, उसके लिए भी कोर्ट-कचहरी है। कोर्ट के माध्यम से इसे भी झेलेंगे, कोई बात नहीं। पूर्व IPS बोले- 40 साल बाद कागज ढूंढा जा रहा है इस मामले में रघुवीर सिंह मीना का कहना है कि 1984 में सर्टिफिकेट जारी हुआ था। अब 40 साल बाद उसे ढूंढा जा रहा है।
📡 स्रोत: NewsData.io