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सुभाष चंद्रा बोले- ₹22,000 करोड़ के कर्ज पर भ्रम फैलाया:मेरी निजी उधारी शून्य, लाइव आकर 3 पन्नों का डॉक्यूमेंट दिखाया; माल्या ने सवाल उठाए थे

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
सुभाष चंद्रा बोले- ₹22,000 करोड़ के कर्ज पर भ्रम फैलाया:मेरी निजी उधारी शून्य, लाइव आकर 3 पन्नों का डॉक्यूमेंट दिखाया; माल्या ने सवाल उठाए थे

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा ₹22 हजार करोड़ के कर्ज को महज ₹6.5 करोड़ में निपटाने के प्लान को मंजूरी मिलने पर जी ग्रुप के फाउंडर और हरियाणा के पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ.

सुभाष चंद्रा विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद और #PaisaVapasKaro ट्रेंड पर अब सुभाष चंद्रा ने सफाई दी है। चंद्रा आज सोशल मीडिया पर लाइव आए और 3 पन्नों का डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए दावा किया है कि इस पूरे मामले में गलत धारणाएं और गलतफहमी फैलाई जा रही हैं। यह विवाद तब और गहरा गया था जब भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर NCLT के फैसले को "भारतीय इंसाफ का असली मजाक" करार दिया था और आरोप लगाया था कि 22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को महज कुछ करोड़ में निपटाया जा रहा है।

डॉक्यूमेंट्स के जरिए सुभाष चंद्रा ने क्या दावे किए… दस्तावेजों में ये दिया प्रमुख बैंकों और लेंडर्स का ब्योरा अब जानिए सुभाष चंद्रा के कर्ज निपटारे का मामला क्या है… सवाल 1.

NCLT ने सुभाष चंद्रा के पर्सनल इंसॉल्वेंसी मामले में क्या फैसला सुनाया है?

जवाब: इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल NCLT ने सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 114 के तहत मंजूरी दे दी है। इसके तहत सुभाष चंद्रा को ₹22,006.57 करोड़ के कुल कर्ज के बदले महज ₹6.5 करोड़ का भुगतान करना होगा। इसके बाद उनका बाकी का पूरा ₹22,000 करोड़ से अधिक का बकाया कानूनी तौर पर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। सवाल 2.

यह फैसला किसने सुनाया और ट्रिब्यूनल में राय क्या थी?

जवाब: इससे पहले NCLT की दो सदस्यीय बेंच में इस मामले को लेकर विभाजित राय आई थी। इसके बाद NCLT चेयरमैन ने तीसरे सदस्य के रूप में जुडिशियल मेम्बर नीलेश शर्मा को नियुक्त किया। नीलेश शर्मा ने बहुमत के आधार पर 144 पन्नों के आदेश में रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी। सवाल 3.

क्या सुभाष चंद्रा ने खुद ₹22,006 करोड़ का पर्सनल लोन लिया था?

जवाब: नहीं, यह रकम सुभाष चंद्रा द्वारा दी गई 'पर्सनल गारंटी' से जुड़ी है। जब किसी कंपनी या मूल कर्जदार को बैंक लोन देते हैं, तो कई बार प्रमोटर अपनी व्यक्तिगत गारंटी देता है कि अगर कंपनी भुगतान नहीं कर पाई, तो वह इसे चुकाएगा। एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के लिए गए लोन के लिए सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। कंपनियों के डिफॉल्ट क

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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