सुप्रीम कोर्ट बोला- दिल्ली-NCR में गैंगरेप निर्भया कांड जैसे:पूछा- उस घटना से क्या सबक लिया; 4 अगस्त को चलती बस में नाबालिग से घटना हुई थी
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पिछले दिनों नाबालिगों से गैंगरेप के तीन मामलों पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। इनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर के मामले शामिल हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के.
विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि इन घटनाओं से 2012 के निर्भया कांड की याद आती है और सवाल उठता है कि क्या उस घटना से कोई सबक लिया गया। 2012 में दिल्ली में चलती बस में 23 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। पार्क, सड़क और बस की इन 3 घटनाओं पर कोर्ट ने नोटिस लिया कोर्ट ने पुलिस की गश्त और निगरानी पर सवाल उठाए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ हाल की यौन हिंसा की घटनाओं पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन से सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर गश्त, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि ये घटनाएं पार्क, सड़क और बस जैसे सार्वजनिक स्थानों पर हुई हैं। कोर्ट ने कहा कि कम गश्त और निगरानी की कमी के कारण पार्क, सड़क, बस, मेट्रो स्टेशन और सब-वे जैसे सार्वजनिक स्थानों को असुरक्षित नहीं बनाया जा सकता।
लोगों को सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि हिंसा से मुक्त होकर सम्मान के साथ जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। आस्था कुंज पार्क की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकायतें की थीं।
इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए गए। दिल्ली में हर दिन बच्चों से यौन अपराध के 4 मामले NCRB के मुताबिक, 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 केस दर्ज हुए। यानी औसतन हर दिन 4 से ज्यादा मामले सामने आए। 2025 की रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप के तीन मामलों पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा, जो 2012 के निर्भया कांड की याद दिलाते हैं। यह विषय महिलाओं की सुरक्षा और नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर केंद्रित है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि उच्चतम न्यायालय इन घटनाओं को गंभीरता से ले रहा है और पूछ रहा है कि क्या 2012 के बाद से कोई बदलाव आया है। यदि पुलिस और कानून प्रवर्तन में सुधार नहीं हुआ, तो आम जनता को यह महसूस हो सकता है कि उनके अधिकार सुरक्षित नहीं हैं, जिससे समाज में अविश्वास औ