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सुप्रीम कोर्ट बोला- लॉ स्टूडेंट्स पर कार्रवाई यूनिवर्सिटी का अधिकार:जब तक वकील नहीं बनते, बार काउंसिल छात्रों पर एक्शन नहीं ले सकती

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
सुप्रीम कोर्ट बोला- लॉ स्टूडेंट्स पर कार्रवाई यूनिवर्सिटी का अधिकार:जब तक वकील नहीं बनते, बार काउंसिल छात्रों पर एक्शन नहीं ले सकती

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई संबंधित विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान अपने नियमों के तहत कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े विवाद में दिया। मामले में BCI ने छात्रों के खिलाफ दो आदेश जारी किए थे। कोर्ट ने दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। हालांकि, BCI ने विवाद बढ़ने के बाद इन दोनों आदेशों को खुद ही कुछ ही घंटों बाद वापस ले लिया था।

CJI के दीक्षांत समारोह में शामिल होने को लेकर हुआ था विवाद यह विवाद 14 अगस्त को शुरू हुआ था। BCI ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को अगले आदेश तक अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत न किया जाए। यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद की गई थी, जिनमें छात्रों पर CJI सूर्यकांत के विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के प्रस्ताव का विरोध करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगा था।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर CJI सूर्यकांत ने BCI के दखल पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था, “यह छात्रों और मेरे बीच बातचीत है। BCI कौन होती है दखल देने वाली?

यह पूरी तरह अनुचित है।” वकील बनने से पहले बार काउंसिल का नियंत्रण नहीं CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.

मोहना की बेंच ने कहा कि जब तक छात्र वकील नहीं बन जाते, तब तक बार काउंसिल उन पर पेशेवर नियमों के तहत नियंत्रण नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि छात्रों के आचरण पर फैसला लेने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित शैक्षणिक संस्थान के पास है। यूनिवर्सिटी अपने नियमों और तय प्रक्रिया के तहत छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून के छात्रों के आचरण पर नियंत्रण या अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार नहीं है। इस फैसले के अनुसार, केवल विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्था ही अपने नियमों के तहत छात्रों के खिलाफ कदम उठा सकती है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शैक्षणिक स्वतंत्रता और छात्रों के अधिकारों को मजबूत करता है, तथा बार काउंसिल को केवल वकीलों पर ही अधिकार देता है। आम जनता पर इसका असर यह है कि कानून के छात्रों को अधिक संरक्षण मिलेगा, जिससे कानू

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