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सुप्रीम कोर्ट बोला-प्राइवेट यूनिवर्सिटी मुनाफे के लिए नहीं चल सकती:6 हफ्ते में ऑडिटेड खाते और फीस-खर्च का ब्योरा मांगा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 19 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सुप्रीम कोर्ट बोला-प्राइवेट यूनिवर्सिटी मुनाफे के लिए नहीं चल सकती:6 हफ्ते में ऑडिटेड खाते और फीस-खर्च का ब्योरा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि निजी यूनिवर्सिटी मुनाफे के लिए नहीं चल सकतीं। उनका उद्देश्य शिक्षा के बड़े सार्वजनिक हित की सेवा करना होना चाहिए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह हफ्ते में ऑडिटेड खातों की जानकारी देने का आदेश दिया। इसमें सरप्लस आय, खर्च, फीस कलेक्शन और कर्मचारियों की सैलरी का ब्योरा शामिल है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एडमिशन, भर्ती और पढ़ाई के स्तर से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि इन संस्थानों को केवल कमाई के उद्योग की तरह चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दरअसल, यह आदेश एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में दिया गया है। इसमें एक छात्रा ने कॉलेज रिकॉर्ड में नाम बदलने की मांग की थी, जिसके बाद उसे परेशान किया गया।

कोर्ट पहले भी दे चुका निर्देश कोर्ट ने नवंबर 2025 में भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए थे। तब उनसे यूनिवर्सिटी बनाने की प्रक्रिया, दी गई सुविधाओं और “नो प्रॉफिट नो लॉस” नियम लागू करने वाले ढांचे की जानकारी मांगी गई थी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बताना होगा कि एडमिशन के समय और कोर्स के दौरान छात्रों से कितनी फीस ली गई।

उन्हें टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती करने वाले बोर्ड की जानकारी भी देनी होगी। एमिटी यूनिवर्सिटी मामले की जांच एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता छात्रा के साथ हुई घटना की शुरुआती जांच करने को कहा था। कमेटी को एमिटी यूनिवर्सिटी से संपर्क करके सबूत जुटाने का भी निर्देश दिया गया था।

छात्रा के वकील ने कोर्ट को बताया कि कई बार याद दिलाने के बावजूद कई गवाह बयान देने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने यूनिवर्सिटी और सभी संबंधित अधिकारियों को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अंतिम रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख तक जमा करने को कहा। नो प्रॉफिट-नो लॉस मॉडल और कानूनी नियम भारत में कॉलेज कोई निजी बिजनेस नहीं, बल्कि ट्रस्ट या सोसाइटी के तहत चलने वाली सेवा संस्थान होते हैं।

इनका मकसद मुनाफा कमाना नहीं, सिर्फ अपनी लागत निकालना होता है। यदि फीस से कोई बचत होती भी है, तो मालिक उसे अपनी जेब में नहीं रख सकते; वह पूरा पैसा कॉलेज और पढ़ाई के सुधार में ही लगाना पड़ता है और इसका पाई-पाई का हिसाब पारदर्शी रख

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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