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सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन

कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं प्रबंधन, प्रसव कक्षों में गुणवत्ता सुधार, प्रसूति संबंधी जटिलताओं के प्रभावी प्रबंधन तथा मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। कार्यशाला का उद्देश्य सुमन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजनाओं में परिवर्तित कर प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को शून्य करना है। एनएचएम मध्यप्रदेश एवं यूएनएफपीए ने इस दिशा में जिलों को तकनीकी एवं कार्यक्रम संबंधी सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यशाला को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर आयुक्त डॉ. पवन कुमार ने वर्चुअल संबोधित किया। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना एवं मातृ स्वास्थ्य की वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की रणनीति पर विचार साझा किए। कार्यशाला में प्रदेश के सभी 52 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा कार्यक्रम प्रबंधक शामिल हुए।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन एक कार्यशाला थी जिसमें गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रबंधन, प्रसव कक्षों में गुणवत्ता सुधार, जटिलताओं के प्रभावी प्रबंधन और मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रणाली पर चर्चा हुई। यह विषय मातृ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि मातृ मृत्यु दर को शून्य करना स्वास्थ्य प्रणाली की दक्षता और गर्भवती महिलाओं के अधिकारों को दर्शाता है। इस पहल से आम जनता को सुरक्षित प्रसव, समय पर च

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।