स्वास्थ्य विभाग के GPF खातों में गड़बड़ी:बांदा-महोबा की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी, कई कर्मचारी जांच के घेरे में
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बांदा और महोबा के स्वास्थ्य विभाग में जीपीएफ खातों में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। दोनों जिलों में जांच के दौरान कर्मचारियों के जीपीएफ खातों से उपलब्ध रकम से ज्यादा पैसे निकालने और रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई है। बांदा में तिंदवारी पीएचसी में तैनात ऑप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार के जीपीएफ खाते में करीब 70 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली है।
जांच में पता चला कि उन्होंने खाते में मौजूद रकम से ज्यादा लोन लिया और पहले निकाले गए पैसों का रिकॉर्ड में सही हिसाब नहीं रखा। बाद की जांच में चार और कर्मचारियों के खातों में भी करीब 23 लाख रुपये की गड़बड़ी मिलने की बात कही गई है। प्रयागराज की ऑडिट टीम ने जीपीएफ पासबुक और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान किया।
इसमें कुछ पासबुक में लोन की पुरानी एंट्री वाले पन्ने गायब मिले। ऑडिट टीम की आखिरी रिपोर्ट सीएमओ डॉ.
विजेंद्र सिंह ने देवेंद्र कुमार का बैंक खाता सीज करवा दिया है और उनका वेतन भी रोक दिया है। विभाग अब उनसे पैसे वसूलने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, ऑडिट टीम की आखिरी रिपोर्ट अभी बांदा स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिली है। महोबा में यह मामला 17 अगस्त को प्रयागराज से आई ऑडिट टीम की जांच में सामने आया था।
जिला महिला अस्पताल में जीपीएफ का काम देख रहे जूनियर असिस्टेंट संतोष कुमार वर्मा के खाते में करीब 82.96 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली। 11.66 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली आरोप है कि फर्जी रिकॉर्ड के जरिए खाते में मौजूद रकम से ज्यादा पैसे निकाले गए। जांच में पता चला कि यह गड़बड़ी करीब सात साल से चल रही थी।
सीएमएस के ड्राइवर अंबिका के खाते में भी करीब 11.66 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली है। दोनों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं और उनका वेतन भी रोक दिया गया है। संतोष कुमार वर्मा ने पैसे जमा करने के लिए समय मांगा है और मकान बेचकर रकम लौटाने का भरोसा दिया है। दोनों जिलों की रिपोर्ट स्वास्थ्य मुख्यालय के जरिए शासन को भेजी गई है।
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ.
अभय सिंह ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रयागराज की ऑडिट टीम ने दोबारा जांच की है।
📡 स्रोत: NewsData.io