स्विट्जरलैंड में राजस्थान की लोक संस्कृति का परचम
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
जयपुर, 11 अक्टूबर। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत की गूंज एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुनाई दी। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार रहीस भारती और उनके बैंड ‘धोद – ग्रुप ऑफ राजस्थान’ ने स्विट्जरलैंड के प्रतिष्ठित फोयर दु वले महोत्सव में शानदार प्रस्तुतियां देकर हजारों विदेशी दर्शकों का दिल जीत लिया। राजस्थानी लोक संगीत, कालबेलिया नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और रंग-बिरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने महोत्सव में भारतीय संस्कृति की अनूठी छाप छोड़ी। प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का अभिवादन किया।
महोत्सव के 66 वर्षों के इतिहास में पहली बार भारत को ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ यानी विशेष अतिथि देश का गौरव प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत और राजस्थान का प्रतिनिधित्व रहीस भारती तथा उनके अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समूह ‘धोद – ग्रुप ऑफ राजस्थान’ ने किया। करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में लगभग 2.5 लाख दर्शकों के शामिल होने का अनुमान है।
रहीस भारती ने इस उपलब्धि को केवल अपने समूह का सम्मान नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और राजस्थान की लोक परंपराओं का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना गर्व के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने दुनिया के सामने प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को प्रस्तुत किया।
रहीस भारती पिछले 26 वर्षों से राजस्थान की लोक कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके नेतृत्व में ‘धोद – ग्रुप ऑफ राजस्थान’ अब तक 119 से अधिक देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है। इस दौरान उन्होंने राजस्थान के दूर-दराज के गांवों से लोक कलाकारों को तलाशकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया।
इससे सैकड़ों कलाकारों को वैश्विक पहचान के साथ सम्मानजनक आजीविका के अवसर भी मिले हैं। वर्तमान में रहीस भारती और उनकी टीम पिछले आठ महीनों से लगातार यूरोप के सांस्कृतिक दौरे पर हैं। इस दौरान समूह विभिन्न प्रतिष्ठित संगीत महोत्सवों, सांस्कृतिक आयोजनों और कॉन्सर्ट में प्रस्तुतियां देकर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
राजस्थानी लोक संगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और कालबेलिया नृत्य के जरिए समूह विदेशों में राजस्थान की पहचान को मजबूत कर रहा है। स्विट्जरलैंड के फोयर दु वले महोत्सव में मिली यह उपलब्धि राजस्थान की लोक कलाओं की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहुंच को रेखांकित करती है।
रहीस भारती और ‘धोद’ ग्रुप की प्रस्तुतियों ने एक बार फिर साबित किया कि राजस्थान का लोक संगीत भाषा और भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने की क्षमता रखता है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना इस खबर का मुख्य विषय है। यह कहानी बताती है कि कैसे जयपुर के कलाकार रहीस भारती और ‘धोद – ग्रुप ऑफ राजस्थान’ ने स्विट्जरलैंड के फोयर दु वले महोत्सव में अपनी कलात्मक प्रस्तुति से हजारों विदेशी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय सांस्कृतिक विविधता को विश्व स्तर पर मान्यता देती है और राजस्थानी संगीत के वैश्विक प्रभाव को उजागर करती है। इसके परिणामस्वरूप आम जनता में सांस्कृतिक गर्व बढ़ेगा,