टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस, सभी आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया
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टाइगर श्रॉफ पर 18 अक्टूबर को फायरिंग हुई थी.
टाइगर फुटबॉल मैच खेलकर जा रहे थे, उस वक्त उनकी गाड़ी पर 7 राउंड फायरिंग हुई इस फायरिंग में टाइगर बाल-बाल बचे. लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. इस मामले में लगातार अपडेट सामने आ रहे हैं.
सोमवार को गिरफ्तार 4 आरोपियों की पुलिस कस्टडी खत्म हुई.
इसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल के अधिकारी आरोपियों को पेशी के लिए किला कोर्ट लेकर पहुंचे.
सरकारी वकील ने चारों आरोपियों की पुलिस कस्टडी 31 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की थी.
सरकारी वकील के मुताबिक, मामले में पैसों के लेन-देन की जांच करनी है और आरोपियों के वॉयस सैंपल भी लेने हैं. इसीलिए 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी की मांग की गई थी.
कोर्ट ने सभी आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है.
मुंबई पुलिस के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना में दो ग्रुप शामिल थे.
एक ग्रुप ने फायरिंग की, जबकि दूसरे ग्रुप ने रेकी की थी.
सिग्नल ऐप से बातचीत: आरोपियों ने अपने हैंडलर्स से संपर्क करने के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया था.
ऑडियो क्लिप्स: पुलिस को कई ऑडियो क्लिप्स मिली हैं, जिनसे आरोपियों के मुंबई आने की वजह का पता चलता है.
हथियार लौटाने के निर्देश: फायरिंग के बाद आरोपियों को घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार वापस भेजने के लिए कहा गया था.
अनिल पंडित के कहने पर फायरिंग: पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अनिल पंडित के निर्देश पर फायरिंग की थी.
बता दें कि इस मामले में दो लोग घायल हुए.
पहला टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर, दूसरा टाइगर के एक फैन जो गाड़ी के साइड में चल रहे थे.
गाड़ी पर फायरिंग होने के बाद जब ड्राइवर को गोली लगी तो टाइगर खुद गाड़ी चलाकर हॉस्पिटल पहुंचे थे. इस फायरिंग में टाइगर को भी चोट आई. टाइगर की टीम ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया.
वीडियो में देखा जा सकता है कि टाइगर के हाथ पर गोलियों के छर्रों के निशान थे.
📡 स्रोत: ABP Live Film
🎙️ जनता का संदेश का मत
टाइगर श्रॉफ पर हुए इस दुखद हमले से हमें यह याद दिलाता है कि हिंसा कभी समाधान नहीं देती। जब भी किसी संघर्ष का सामना हो, शांतिपूर्ण संवाद, कानूनी मार्ग और सामुदायिक समर्थन को प्राथमिकता दें। समाज में सहानुभूति और न्याय की भावना को बढ़ावा देकर हम ऐसे अपराधों को रोक सकते हैं। पीड़ित और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना रखते हुए, हमें मिलकर एक सुरक्षित और समावेशी समाज की ओर बढ़ना चाहिए।