3 तलाक देने के बाद नवविवाहिता ने की सुसाइ़ड:परिजनों का आरोप- फोन पर कहासुनी के दौरान दिया तलाक, 4 महीने पहले हुई थी शादी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बहराइच में गुरुवार को एक नवविवाहिता ने फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों का आरोप है कि पति ने फोन पर ही उसे तीन तलाक दे दिया था, जिससे वह आहत थी। इसके बाद वह अपने कमरे में चली गई और कुछ देर बाद फंदे से लटकी मिली। सूचना पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच की। शुक्रवार दोपहर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मामला फखरपुर थाना क्षेत्र के कुंडासपारा मुड़की गांव की है। चार महीने पहले हुई थी शादी कुंडासपारा मुड़की निवासी उमेसलमा (22) की शादी करीब चार महीने पहले रमजान के साथ हुई थी। रमजान भी फखरपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। शादी के बाद वह काम के सिलसिले में दिल्ली चला गया था। फोन पर कहासुनी के बाद कमरे में गई परिजनों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर उमेसलमा और उसके पति के बीच फोन पर किसी बात को लेकर कहासुनी हुई।
आरोप है कि इसी दौरान रमजान ने फोन पर ही उमेसलमा को तीन तलाक दे दिया। पति की बात से परेशान होकर उमेसलमा अपने कमरे में चली गई। काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आने पर उसकी मां को चिंता हुई। परिजनों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया तो उमेसलमा फंदे से लटकी मिली।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य परिजनों ने उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलने पर फखरपुर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल की जांच कर जरूरी साक्ष्य जुटाए। शुक्रवार दोपहर पुलिस ने पंचनामा भरने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
शिकायत मिली, रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई थाना प्रभारी रामकुमार राजभर ने बताया कि मामले में शिकायत मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
इस दुखद घटना से यह सिखना चाहिए कि भावनात्मक आहत को कानूनी और संवाद के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। तलाक, विवाद या अपमान के समय साथी, परिवार और समाज को सहानुभूति और समर्थन देना अनिवार्य है। जब किसी को निराशा महसूस हो, तो तुरंत किसी विश्वसनीय मित्र, परामर्शदाता या हेल्पलाइन से बात करें। आत्म-संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए समाज को जागरूक और संवेदनशील बनना चाहिए।