टाटा संस को लाना ही होगा आईपीओ, बॉम्बे हाई कोर्ट में RBI की कैविएट
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट (Caveat) दाखिल कर टाटा संस (Tata Sons) की लिस्टिंग या IPO को रोकने की कानूनी कोशिशें सीमित कर दी है.
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, टाटा संस की NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को नामंजूर करने के बाद रिजर्व बैंक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक 'कैविएट' (सूचना की अर्जी) दायर की है.
RBI ने ऐसा क्यों किया?
RBI ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस मामले में कोई भी आदेश जारी होने से पहले उनकी बात सुनी जाए.
यानी कि अगर टाटा संस, टाटा ट्रस्ट्स या कोई अन्य शेयरधारक RBI के अनिवार्य लिस्टिंग वाले फैसले को अदालत में चुनौती देता है, तो कोर्ट RBI का पक्ष सुने बिना कोई भी एकतरफा स्थगन आदेश या अंतरिम राहत जारी न कर सके.
RBI ने सितंबर 2026 में टाटा संस की उस अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसे कंपनी ने मार्च 2024 में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दायर किया था.
इस फैसले के बाद टाटा संस के लिए स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना जरूरी हो गया है क्योंकि वह RBI के 'अपर-लेयर' NBFC (NBFC-UL) के नियमों के दायरे में आती है.
हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स जैसे कई शेयरहोल्डर यूनिट्स, जिसके पास कंपनी की दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी है- इस लिस्टिंग के पक्ष में नहीं हैं.
क्यों लिस्टिंग से बच रही टाटा संस?
टाटा संस (Tata Sons) ने वित्त वर्ष 2023-24 में अपना 21,813 करोड़ का पूरा स्टैंडअलोन लोन चुका दिया था और कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो गई थी.
कर्ज चुकाने के बाद मार्च 2024 में टाटा संस ने RBI के पास अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए अर्जी भी दी थी.
कंपनी का कहना था कि चूंकि उन्होंने अपना पूरा कर्ज चुका दिया है और अभी वे सीधे तौर पर बैंकों या जनता से कोई नया फंड नहीं जुटा रहे हैं इसलिए उन्हें NBFC फ्रेमवर्क और अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिलनी चाहिए.
इस पर RBI ने तर्क देते हुए कहा कि भले ही टाटा
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर टाटा संस के आईपीओ को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल करने के इर्द-गिर्द घूमती है। यह विषय वित्तीय नियमन और बड़े कॉर्पोरेट लिस्टिंग प्रक्रिया से जुड़ा है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि टाटा संस जैसी प्रमुख कंपनी का आईपीओ भारतीय बाजार में निवेशकों के लिए नया अवसर पैदा कर सकता है, और RBI का कदम नियामक सख्ती और निवेशक सुरक्षा को दर्शाता है। आम जनता पर इसका असर निवेश के विकल्पों पर पड़ेगा, और बाजार में उतार-चढ़ाव तथा निवेशकों के विश्वास पर असर डालेगा।