तेल तो सस्ता मिल रहा, लेकिन भारत कैसे आए? टैंकर के महंगे किराए ने बिगाड़ा खेल
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ईरान और यूएस के बीच शुरू हुए तनाव के बाद से ही भारत में जो कच्चे तेल की परेशानी आई है, वो अब तक भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है.
ना केवल भारत बल्कि इस समय दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर परेशानी बढ़ रही है.
वहीं, उत्तर और दक्षिण अमेरिका में भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध है, बावजूद इसके इसे अन्य देशों तक पहुंचाने में परेशानी आ रही है.
ये परेशानी है खर्च का बढ़ना.
दरअसल रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है. ऐसे में भारत को अमेरिका से सस्ता तेल खरीदने का मौका मिल सकता है.
लेकिन महंगी ढुलाई और रिफाइनरियों की लिमिटेड क्षमता इस फायदे को कम कर सकती है.
अमेरिका में क्यों जमा हो रहा सस्ता तेल?
भारी कच्चा तेल हल्के तेल की तुलना में ज्यादा गाढ़ा होता है और आमतौर पर कम कीमत पर मिलता है.
लेकिन अमेरिका से एशिया तक तेल पहुंचाने का खर्च बहुत बढ़ गया है.
रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले हफ्ते अमेरिका से एशिया तक एक बड़े टैंकर से तेल भेजने का खर्च 8 करोड़ डॉलर यानी करीब 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. साल की शुरुआत में ये खर्च 1 से 1.5 करोड़ डॉलर था.
तो वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला से तेल का निर्यात बढ़ा है, कनाडा में उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है और अमेरिका ने अपने आपातकालीन भंडार से 13 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल जारी किया है.
इससे अमेरिका में तेल का स्टॉक बढ़ा है.
भारत खरीद रहा वेनेजुएला से तेल
रूस से तेल महंगा होने और अमेरिकी टैरिफ का खतरा बढ़ने के कारण भारत दूसरे देशों से तेल खरीदने के ऑप्शंस तलाश रहा है.
Kpler के मुताबिक भारत को वेनेजुएला से अक्टूबर में रोजाना करीब 4.65 लाख बैरल तेल मिला है. सितंबर में ये मात्रा करीब 1.96 लाख बैरल प्रतिदिन थी.
हालांकि कुछ जहाजों के देर से पहुंचने के कारण वास्तविक औसत सप्लाई कम रह सकती है.
फिर होर्मुज से तेल खरीद रहा भारत
भारतीय रिफाइनरियां अब फारस की खाड़ी से तेल लाने के लिए अ
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भारत में कच्चे तेल की कीमतें सस्ती हो रही हैं, पर टैंकर किराए के बढ़े हुए खर्चों से यह लाभ कम हो रहा है। यह विषय तेल परिवहन लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर केंद्रित है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ कैसे घरेलू ऊर्जा कीमतों को प्रभावित करती हैं, भले ही कच्चा तेल सस्ता उपलब्ध हो। आम जनता पर इसका असर ऊर्जा बिलों में वृद्धि, परिवहन लागत में बढ़ोतरी और उद्योगों के उत्पादन खर्च में बढ़ोतरी के रूप में महसूस हो सकता है, जिससे समग्र आर्थिक दबाव बढ