थानाध्यक्ष ने बीडीओ-सीओ और ईओ को पत्र लिखकर कहा- विसर्जन जुलूस में रहें
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‘अनुरोध’ की भाषा में गजटेड अफसरों को लिखा गया थानाध्यक्ष का एक पत्र सुर्खियों में रहा। मामला चेवाड़ा का है। थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार ने बाकायदा हस्ताक्षर और मुहर के साथ पत्र जारी कर बीडीओ, सीओ और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भेजकर गणपति विसर्जन जुलूस में अंचल गार्डों के साथ आने को कह दिया।
वह भी जुलूस से चंद घंटे पहले। इस पत्र की चर्चा बुधवार को चेवाड़ा प्रखंड मुख्यालय से लेकर शेखपुरा के जिलास्तरीय पदाधिकारियों तक में रही। अधिकारियों का कहना है कि यद्यपि पत्र की भाषा में "अनुरोध है’ लिखा गया है, लेकिन एक इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर रैंक के थानाध्यक्ष द्वारा सीधे राजपत्रित सिविल अधिकारियों को पत्र भेजकर विधि-व्यवस्था ड्यूटी में रहने को कहना पूरी तरह से स्थापित प्रशासनिक प्रोटोकॉल के विरुद्ध है।
किसी अधिकारी को सीधे पुलिस थानाध्यक्ष द्वारा ड्यूटी सौंपने के बजाय सक्षम वरीय अधिकारी के स्तर से समन्वय और प्रतिनियुक्ति किया जाना प्रशासनिक दृष्टि से अधिक उपयुक्त माना जाता है। इधर, चेवाड़ा के बीडीओ अमर कुमार अमर ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में होने वाले इस तरह के धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी बीडीओ और सीओ की होती है।
सीओ कार्यालय में तैनात सुरक्षा गार्ड को भी विसर्जन के दौरान ड्यूटी में रहने को कहा गया था। अंचल गार्ड की सुरक्षा व्यवस्था में प्रतिनियुक्ति को लेकर ही थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार ने पत्र लिखकर अनुरोध किया था। क्यों खड़ा हुआ विवाद? {नियमतः त्योहारों में मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति डीएम और एसपी के संयुक्त आदेश से होती है।
पहले से ऐसा नहीं हुआ, जबकि गणपति पूजन पहले से प्रस्तावित था। {उल्टा पदानुक्रम: बीडीओ, सीओ और ईओ राजपत्रित अधिकारी और कार्यपालक दंडाधिकारी होते हैं। इंस्पेक्टर रैंक के थानाध्यक्ष उन्हें निर्देश या ऐसा अनुरोध पत्र सीधे नहीं भेज सकते। {शॉर्टकट अपनाया: थानाध्यक्ष को पहले अपने वरीय अधिकारी (एएसपी या एसपी) को प्रस्ताव भेजना था, जिसके बाद वे एसडीएम अथवा डीएम से समन्वय स्थापित कर आधिकारिक आदेश जारी करवाते।
थानाध्यक्ष ने ‘अनुरोध पत्र’ जारी कर इसकी प्रतिलिपि एसडीओ व एसडीपीओ को भेजी। एएसपी बोले- थानाध्यक्ष ने अनुरोध किया था अपर पुलिस अधीक्षक डॉ.
राकेश कुमार ने बताया कि गणेश पूजा विसर्जन के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से थानाध्यक्ष ने अधिकारियों से अंचल गार्ड के साथ विसर्जन में शामिल रहने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी होता है।
📡 स्रोत: NewsData.io