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थोक महंगाई में फिर आया उछाल, अगस्त में 9.92% पहुंची, पेट्रोल-गैस ने बढ़ाई तपिश

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
थोक महंगाई में फिर आया उछाल, अगस्त में 9.92% पहुंची, पेट्रोल-गैस ने बढ़ाई तपिश

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 सितंबर को अगस्त 2026 के थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के आंकड़े जारी किए. अगस्त में थोक महंगाई 9.92% रही जबकि जुलाई में ये 9.78% थी.

अब थोक महंगाई का ये आकंड़ा आपकी जेब पर क्या असर करेगा, ये समझने वाली बात है. क्या बाजार में हर सामान 10% महंगा हो गया है? और अगर WPI इतनी ज्यादा है तो इसका असर हमें अपनी जेब पर क्यों नहीं दिखता?

क्या है WPI?

WPI यानी थोक मूल्य सूचकांक.

आसान भाषा में कहें तो यह उस कीमत का हिसाब है, जिस पर सामान थोक बाजार में बिकता है यानी फैक्ट्री से सामान निकलने के बाद जब वह बड़े व्यापारी या दुकानदार तक पहुंचता है उस समय उसकी कीमत में कितना बदलाव हुआ है ये WPI उसे बताता है.

WPI वह कीमत नहीं है जो आप दुकान पर जाकर चुकाते हैं. दुकान पर ग्राहक जिस कीमत पर सामान खरीदता है उसकी तस्वीर CPI से मिलती है.

एक और फर्क है.

WPI में सर्विसेज शामिल नहीं होतीं यानी स्कूल की फीस, डॉक्टर की फीस, किराया या मोबाइल रिचार्ज जैसी चीजें WPI में नहीं आतीं.

इसमें मुख्य रूप से सामान की कीमतें देखी जाती हैं, जैसे अनाज, सब्जियां, पेट्रोलियम, स्टील, सीमेंट, कपड़ा, केमिकल और दूसरी चीजें.

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9.92% का मतलब क्या है?

अगस्त में WPI महंगाई 9.92% रही. इसका मतलब यह नहीं है कि हर सामान 9.92% महंगा हो गया.

इसका सीधा मतलब है कि अगस्त 2025 के मुकाबले अगस्त 2026 में WPI में शामिल सामानों की कीमतों में औसतन 9.92% की बढ़ोतरी हुई.

इसे ऐसे समझिए कि अगर कोई सामान पिछले साल थोक में 100 रुपये का था तो औसत बढ़ोतरी के हिसाब से अब उसकी कीमत करीब 110 रुपये हो सकती है. लेकिन हर सामान की कीमत एक जैसी नहीं बढ़ती.

कुछ चीजें ज्यादा महंगी होती हैं कुछ कम और कुछ के दाम घट भी सकते हैं.

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📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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