ट्रंप का दावा- ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना बड़ी उपलब्धि, तेहरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
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US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह से अभी भी खत्म नहीं हुआ है. पिछले करीब आठ महीनों से दोनों देशों के बीच भारी तनाव बना हुआ है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है.
ट्रंप ने कहा है कि उनके प्रशासन ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोककर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है.
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़े फैसले लेने पड़े.
ट्रंप का कहना है कि अगर अमेरिका ने समय रहते कदम नहीं उठाए होते, तो ईरान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की स्थिति में पहुंच सकता था.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस कदम को अपने प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बताया.
उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा होने वाले खतरे का सामना करने के लिए जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत थी, वह पहले किसी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं दिखाई.
विवाद की असली वजह नहीं परमाणु मुद्दा- ईरान अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ये बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.
एक दिन पहले ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी रुख पर सवाल उठाते हुए कहा था कि परमाणु मुद्दा दोनों देशों के बीच विवाद की असली वजह नहीं, बल्कि एक बहाना है.
इराक के अल-इखबारिया नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू के दौरान अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका को ईरान की उस विदेश नीति से परेशानी है, जिसके तहत तेहरान मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करता.
उन्होंने कहा कि ईरान की स्वतंत्र राजनीतिक सोच और अमेरिकी दबदबे का विरोध ही दोनों देशों के बीच टकराव की असल वजह है.
ईरान की सरकारी मीडिाय IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने कहा कि अमेरिका ईरान की विचारधारा और क्षेत्र में उसकी प्रतिरोध की नीति को स्वीकार नहीं कर पा रहा है.
उन्होंने कहा कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर उठाए जा रहे सवाल इसी व्यापक राजनीतिक टकराव का हिस्सा हैं.
परमाणु समझौते से पीछे हटने पर अमेरिका को घेरा ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया.
उन्होंने कहा कि तेहरान पहले परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समझौता कर चुका था, जिसे व्यापक समर्थन मिला था. बावजूद इसके अमेरिका ने खुद को उस समझौते से अलग कर लिया.
अराघची ने इस्लामाबाद में हुई वार्ता का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति में उन्हें पहले जैसा ही रुख दिखाई दिया.
सैन्य टकराव को लेकर ईरान की चेतावनी अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव के साथ सैन्य गतिविधियां भी चिंता बढ़ा रही हैं.
ऐसे अराघची ने कहा कि वाशिंगटन इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि ईरान के खिलाफ नया युद्ध शुरू करने की कीमत उसे चुकानी पड़ सकती है.
उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य तैयारी किसी भी संभावित अमेरिकी हमले को रोकने में अहम भूमिका निभाती है.
अराघची के मुताबिक, सैन्य संघर्ष के जरिए अमेरिका अपने उद्देश्यों को हासिल नहीं कर पाएगा और ईरान की रक्षा क्षमता उसे ऐसा करने से हर हाल में रोकेगी.
समझौते पर संकट से बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव बता दें कि दोनों देशों के बीच बढ़ते विवाद की एक प्रमुख वजह जून में हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) बताया जा रहा है.
इस समझौते का उद्देश्य दुश्मनी को कम करना और आगे की बातचीत का रास्ता खोलना था. इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी शामिल थी.
हालांकि, समझौते को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है.
बता दें कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य और नागरिक संपत्तियों को निशाना बनाकर हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए.
ऐसे में दोनों देशों के बीच टकराव का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि कूटनीतिक बातचीत को दोबारा आगे बढ़ाने की गुंजाइश बनती है या सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है.
फिलहाल, ट्रंप के दावे और अराघची के आरोप दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को उजागर करते हैं.
📡 स्रोत: NewsData.io