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Trump ने 'अब्दुल' को वोट देने वालों को पागल बताया, उधर से जवाब भी तगड़ा आया

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
Trump ने 'अब्दुल' को वोट देने वालों को पागल बताया, उधर से जवाब भी तगड़ा आया

अमेरिका के मिड टर्म इलेक्शंस के बीच मिशनगन में अमेरिकी सीनेट की रेस इस समय देश की सबसे हॉट और विवादित सियासी जंग बन चुकी है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच चल रही इस शह-मात के खेल में अब व्यक्तिगत टिप्पणियों और तीखे तंज का दौर शुरू हो गया है। साउथ कैरोलना के रॉकिल में आयोजित चुनावी रैली के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के समर्थन में पहुंचे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डॉ.

अब्दुल अल सैयद पर तीखा हमला बोला। ट्रंप ने ना सिर्फ अल सैयद की धार्मिक और जातीय पहचान को निशाना बनाया बल्कि मतदाताओं को भी आड़े हाथों लिया। रैली में उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर अश्वेत और यहूदी मतदाताओं को आगाह किया। ट्रंप ने मंच से कहा अगर आप अश्वेत हैं या यहूदी हैं और आप अब्दुल को वोट देते हैं तो आप पागल हैं।

इसके तुरंत बाद उन्होंने भीड़ को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि आप वैसे भी पागल हैं। इतना ही नहीं ट्रंप ने जनसभा में अल सैयद के मूल नाम को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हुए उन्हें अब्दुल रमजान कहकर संबोधित किया। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का वो पवित्र महीना है जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं।

ट्रंप और उनके समर्थकों द्वारा अल सैयद पर कम्युनिस्ट और जिहादी होने के बेबुनियाद आरोप भी लगाए गए जिसे राजनीतिक विश्लेषक मिशिगन के स्विंग वोटर्स को ध्रुवीकृत करने की एक सोची समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप की इस नस्लीय और धार्मिक टिप्पणी पर पलटवार करने में डॉ.

अब्दुल अल सैयद ने भी देर नहीं की। उन्होंने ट्रंप के इस हमले को सीधे जनता की जेब में और देश की आर्थिक बदहाली से जोड़ दिया। अल सैयद ने अपनी एक जनसभा में ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा, ट्रंप के नेतृत्व में खाने-पीने की चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि अगर वह कह दें कि सबको रमजान मनाना चाहिए तो मुझे हैरानी नहीं होगी। भीड़ की तालियों के बीच उन्होंने बेहद मजाक किया लेकिन गंभीर अंदाज में आगे कहा कि आज के हालात में अगर कोई आपसे पूछे कि रोजा क्यों रख रहे हो?

तो सीधा जवाब होगा भाई खाना खरीदने के पैसे नहीं है। अल सैयद ने स्पष्ट किया कि उनका नाम या उनका धर्म अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों या आसमान छूते मकानों के किराए की वजह नहीं है बल्कि रिपब्लिकन पार्टी की खराब नीतियां इसके लिए जिम्मेदार हैं। जिसे ध्यान भटकाने के लिए ट्रंप नफरत की राजनीति का सहारा ले रहे हैं। कौन है डॉ.

अब्दुल अल सैयद 42 वर्षीय डॉक्टर अब्दुल अल सैयद इस समय अमेरिकी राजनीति के सबसे चर्चित और उभरते हुए प्रगतिशील चेहरों में से एक नजर आ रहे हैं। अगर वे मिगन से चुनाव जीत जाते हैं तो वे सीनेट में एक बड़ा मुस्लिम चेहरा होंगे। अल सैयद का जन्म 31 अक्टूबर 1984 को अमेरिका के डेट्रोइयड में एक इजिपशियन अमेरिकन परिवार में हुआ।

वे बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से स्नातक करने के बाद दुनिया के प्रतिष्ठित रोड्स स्कॉलरशिप हासिल की और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की उपाधि ली। इसके बाद उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री पूरी की। राजनीति में कदम रखने से पहले वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर थे।

जिसे अंग्रेजी में एपिडेमोलॉजी कहा जाता है। साल 2015 में वे महज 30 साल की उम्र में डेट्रॉयड के इतिहास के सबसे युवा हेल्थ डायरेक्टर बने। उन्होंने दिवालिया हो चुके शहर के स्वास्थ्य ढांचे को सुधारा। स्कूलों में लेड यानी कि सीसा का प्रदूषण हटाने के लिए लड़ाई लड़ी और गरीब बच्चों के लिए मुफ्त चश्मों की व्यवस्था की।

📡 स्रोत: NewsData.io

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