इतिहास

TV का पहला 'सास-बहू' सीरियल जिसने बदल दिया भारतीय टेलीविजन का इतिहास

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
TV का पहला 'सास-बहू' सीरियल जिसने बदल दिया भारतीय टेलीविजन का इतिहास

भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक ऐसा सुनहरा दौर भी रहा है जब रात के ठीक साढ़े दस बजते ही देश के करोड़ों घरों में सन्नाटा पसर जाता था और लोग अपने सारे जरूरी काम निपटाकर टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते थे। आज ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और वेब सीरीज के अत्यधिक प्रसार के कारण भले ही पारंपरिक टेलीविजन सीरियल्स का वह पुराना जलवा थोड़ा धीमा पड़ गया हो, लेकिन 2000 के दशक में स्थिति बिल्कुल जुदा थी।

उस दौर में रात का भोजन समय से पहले सिर्फ इसलिए बना लिया जाता था ताकि परिवार का हर सदस्य एक साथ बैठकर अपने पसंदीदा धारावाहिक का आनंद ले सके। महिलाएं टीवी स्क्रीन पर आने वाले किरदारों के सुख-दुख में इस कदर डूब जाती थीं कि सीरियल की कहानी उनके निजी जीवन का हिस्सा लगने लगती थी। भारतीय टीवी जगत में कई ऐतिहासिक धारावाहिक आए जो बाद में कल्ट क्लासिक साबित हुए, लेकिन जिसने भारतीय घरों में 'सास-बहू' और संयुक्त परिवार के हाई-वोल्टेज ड्रामा का ऐसा क्रांतिकारी ट्रेंड शुरू किया जो अगले दो दशकों तक पूरे मनोरंजन जगत पर राज करता रहा, वह सीरियल कोई और नहीं बल्कि एकता कपूर का ऐतिहासिक शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' था।

एकता कपूर का वो मास्टरस्ट्रोक जिसने बदल दी भारतीय घरों की रातें: 2000 में शुरू हुआ था डेली सोप का नया युग साल 2000 में जब स्टार प्लस पर 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' (Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi) का पहला एपिसोड टेलीकास्ट हुआ, तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह शो भारतीय समाज के सांस्कृतिक और टेलीविजन ताने-बाने को पूरी तरह बदलकर रख देगा।

बालाजी टेलीफिल्म्स के बैनर तले टेलीविजन क्वीन एकता कपूर द्वारा निर्मित इस धारावाहिक ने भारतीय मनोरंजन उद्योग में 'डेली सोप' की एक बिल्कुल नई परिभाषा गढ़ी। शो की मुख्य नायिका 'तुलसी विरानी' के रूप में अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने अभिनय किया, जिन्होंने अपने सधे हुए और गरिमामय अंदाज से हर भारतीय गृहणी के दिल में अमिट छाप छोड़ दी।

तुलसी विरानी केवल एक काल्पनिक किरदार नहीं रह गई थीं, बल्कि वह देश के करोड़ों परिवारों के लिए एक आदर्श बहू, ममतामयी मां और मजबूत स्त्री शक्ति का जीवंत प्रतीक बन गईं। वहीं उनके पति 'मिहिर विरानी' के किरदार में अभिनेता अमर उपाध्याय ने ऐसी लोकप्रियता हासिल की कि वे उस समय देश के हर घर के चहेते दामाद और बेटे के रूप में देखे जाने लगे।

जब मिहिर विरानी की मौत पर सड़कों पर भड़क उठी थी जनता: प्रोडक्शन हाउस के दफ्तर पर फेंके गए थे पत्थर इस धारावाहिक के प्रति दर्शकों की दीवानगी और भावनात्मक जुड़ाव किस चरम स्तर पर था, इसका सबसे बड़ा और अविश्वसनीय उदाहरण तब सामने आया जब शो की कहानी में एक अप्रत्याशित मोड़ लाते हुए मिहिर विरानी का अचानक कार एक्सीडेंट और मौत का सीन दिखाया गया।

इस एपिसोड के ऑन-एयर होते ही पूरे देश में मानो शोक की लहर दौड़ गई थी। महिलाएं अपने घरों में रोने लगी थीं और कई जगहों पर लोगों ने भोजन तक त्याग दिया था। बात सिर्फ आंसुओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि नाराज दर्शक मिहिर विरानी के किरदार की कहानी में तुरंत वापसी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए और सार्वजनिक धरने-प्रदर्शन शुरू हो गए।

मीडिया रिपोर्ट्स और ईटाइम्स के खुलासे के अनुसार, गुस्से से बेकाबू हुए कुछ लोगों ने एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस के दफ्तर पर पत्थरबाजी तक कर दी थी और लगातार धमकियां दी जा रही थीं। जनभावनाओं के इस प्रचंड दबाव के आगे आखिरकार मेकर्स को झुकना पड़ा और कहानी में नाटकीय बदलाव कर मिहिर विरानी को दोबारा जीवित वापस लाना पड़ा।

जिस दिन मिहिर की वापसी का विशेष एपिसोड प्रसारित हुआ, उसने उस समय के टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स (TRP) के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया और वह भारतीय टीवी इतिहास का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला सिंगल एपिसोड बन गया। 'रिश्तों के भी रूप बदलते हैं...': घर-घर में गूंजा वो टाइटल ट्रैक जिसे आज भी गुनगुनाते हैं लोग किसी भी धारावाहिक की सफलता में उसके शीर्षक गीत का बहुत बड़ा योगदान होता है, लेकिन 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' का टाइटल ट्रैक केवल एक गाना नहीं था बल्कि हर परिवार का एंथम बन गया था।

इस गाने के बोल 'रिश्तों के भी रूप बदलते हैं, नए नए सांचों में ढलते हैं, एक पीढ़ी आती है एक पीढ़ी जाती है, बनती कहानी नई...' आज भी करोड़ों लोगों की जुबान पर ताजा हैं। इस अमर गीत को गायक पंकज सरावगी और गायिका प्रिया भट्टाचार्य ने अपनी बेहद सुरीली और भावुक आवाज से सजाया था। गाने के विजुअल में तुलसी का हाथ जोड़कर मुख्य द्वार पर विरानी परिवार के सभी सदस्यों का परिचय कराने का सिग्नेचर अंदाज इतना मशहूर हुआ कि आज भी शादी-ब्याह, सोशल मीडिया रील्स और फैमिली गेट-टुगेदर में लोग इस सीन को उसी अंदाज में रीक्रिएट करते नजर आते हैं।

1000 एपिसोड्स का जादुई आंकड़ा पार कर लिम्का बुक में नाम दर्ज: 90s के शोज से क्यों अलग था यह सफर 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' ने सफलता के ऐसे झंडे गाड़े कि इसका नाम आधिकारिक रूप से 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया। यह भारतीय टेलीविजन पर प्रसारित होने वाला पहला ऐसा लॉन्ग-रनिंग डेली सोप बना जिसने सफलतापूर्वक 1,000 एपिसोड्स पूरे करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया।

यह शो साल 2000 से लेकर 2008 तक लगातार आठ वर्षों तक सफलतापूर्वक प्रसारित हुआ और कई बड़े विदेशी लोकेशंस पर भी इसकी शूटिंग की गई थी। हालांकि कई लोग यह सवाल उठाते हैं कि क्या 90 के दशक में सास-बहू के रिश्ते पर सीरियल नहीं बने थे?

इसका जवाब यह है कि साल 1994 में रीमा लागू और सुप्रिया पिलगांवकर अभिनीत मशहूर शो 'तू तू मैं मैं' आया जरूर था, लेकिन वह पूरी तरह एक कॉमेडी और सिटकॉम शो था जिसमें सास-बहू की हल्की-फुल्की और मजेदार नोंक-झोंक दिखाई जाती थी। इसके विपरीत, 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' ने पहली बार शुद्ध ड्रामा, पारिवारिक राजनीति, षड्यंत्र, रिश्तों की जटिलताओं और भव्य भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर डेली सोप के रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बाद टीवी इंडस्ट्री में 'कहानी घर घर की' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे दर्जनों सफल सीरियल्स की बाढ़ आ गई।

📡 स्रोत: NewsData.io

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