उज्जैन- ढोल-ताशों और गणपति बप्पा के जयकारों से गूंजा सतत् शिक्षा अध्ययनशाला परिसर
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सतत् शिक्षा अध्ययनशाला परिसर सोमवार को गणपति बप्पा के जयकारों और ढोल-ताशों की गूंज से भक्तिमय हो उठा । गणेश उत्सव 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना एवं सतत् शिक्षा अध्ययनशाला/पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में भगवान श्री गणेश की मिट्टी से निर्मित प्रतिमा की स्थापना की गई । बप्पा के आगमन से लेकर प्रतिमा स्थापना और शाम की आरती तक पूरे परिसर में उत्सव का माहौल बना रहा । आयोजन में दोनों इकाइयों से जुड़े विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में अन्य विद्यार्थी भी शामिल हुए ।
गणेश प्रतिमा के परिसर में पहुँचने के दौरान विद्यार्थियों ने ढोल-ताशों के साथ बप्पा का जोरदार स्वागत किया । जैसे-जैसे प्रतिमा परिसर की ओर आगे बढ़ी , विद्यार्थियों का उत्साह भी बढ़ता गया । गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के बीच विद्यार्थियों ने नृत्य किया और पूरे उत्साह के साथ बप्पा के आगमन को उत्सव में बदल दिया । इस दौरान परिसर में मौजूद विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी आयोजन का आनंद लिया ।
कार्यक्रम में कुलगुरु अर्पण भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । उनके हाथों भगवान श्री गणेश की आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई । इसके बाद विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ गणेश प्रतिमा को निर्धारित स्थान पर विराजमान कराया गया । विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से आरती में भाग लिया और भगवान श्री गणेश से सभी के सुख , समृद्धि एवं मंगल की कामना की ।
इस अवसर पर सतत् शिक्षा अध्ययनशाला परिसर को विद्यार्थियों ने आकर्षक ढंग से सजाया था । सजावट में विद्यार्थियों की रचनात्मकता साफ नजर आई । आयोजन से पहले ही विद्यार्थियों ने मिलकर परिसर की साज-सज्जा , प्रतिमा स्थापना स्थल की तैयारी , व्यवस्था एवं अन्य जिम्मेदारिया संभाल ली थीं । किसी ने सजावट में योगदान दिया तो किसी ने कार्यक्रम की व्यवस्था और संचालन में अपनी भूमिका निभाई । सामूहिक प्रयास के कारण पूरे आयोजन में एक अलग ही उत्साह नजर आया ।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सतत् शिक्षा अध्ययनशाला परिसर में गणेश उत्सव 2026 के अवसर पर ढोल-ताशों और जयकारों के साथ भगवान श्री गणेश की मिट्टी से बनी प्रतिमा की स्थापना की गई। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत आयोजित किया गया, जिससे परिसर में भक्ति और सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार हुआ। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा संस्थान के सांस्कृतिक और सामाजिक आयामों को उजागर करती है, और छात्रों व शिक्षकों के बीच एकता और प्रेरणा बढ़ाती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि परिसर की गतिविधियाँ अधिक समावेशी बनेंगी, और स्थान