उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर उज्जैन में विकास कार्य तेज, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने विकास कार्यों की सराहना की
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सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेजी से आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के अनुरूप शहर में सड़क, घाट और आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ ही साधु-संतों के लिए स्थायी निर्माण की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने इन विकास कार्यों की सराहना करते हुए सिंहस्थ मद से अखाड़ों और आश्रमों में स्थायी निर्माण कराने की आवश्यकता बताई है।
सिंहस्थ 2028... करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के इस महापर्व को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के लिए उज्जैन में विकास कार्यों का व्यापक खाका धरातल पर उतर रहा है। शहर के चारों दिशाओं में सड़क, सीवरेज और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। बड़नगर रोड का विस्तार भी इसी विकास योजना का हिस्सा है। लगभग 30 फीट चौड़ी सड़क को 120 फीट तक विकसित किया जा रहा है। वहीं, आवागमन को सुगम बनाने के लिए हाईवे और सड़कों का विस्तार किया जा रहा है।
सिंहस्थ की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शिप्रा नदी के किनारे लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण शामिल है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ में सीमित स्नान स्थलों के कारण बड़ी संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इस बार विस्तृत घाट क्षेत्र विकसित होने से करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने उज्जैन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंहस्थ मद से अखाड़ों और आश्रमों में स्थायी प्रकृति के निर्माण कार्य कराने पर जोर दिया। उन्होंने उज्जैन के 13 अखाड़ों और आश्रमों में समय रहते निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की, ताकि साधु-संतों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उनका कहना है कि अस्थायी व्यवस्थाओं के बजाय स्थायी निर्माण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
जहां हमारे प्रधानमंत्री जी है? और हमारे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जी है वहाँ असंभव भी संभव है। और सबसे बड़ी बात है इस समय हमारा प्रयास है उज्जैन का जो शृंगस्थ है दिव्य और भव्य हो। और हम जितेवी संत महात्मा हैं। हम सब माँ भकुति से, माँ छिप्रा मैया से प्रार्थना करते हैं कि जो हमारे मुख्यमंत्री जी का विजन है, जो मुख्यमंत्री जी का सपना है वो पूरा हो जाए।
और हमारा विजन है ऐसा कुंभ हो ना भूतो ना भविष्यति। और आपने देखा होगा जब हम उज्जैन में आते हैं, उज्जैन में एंट्री करते ही पूर्व हो पश्चिम हो उत्तर हो दक्षिण हो चारों दिशाओं में देखो काम ही काम हो रहा है। एक से एक योजनाएं जो है फील्ड में लाई जा रही हैं। जहां पे सिंगल रोड था वहाँ पे छह छह हाइवे बनाए जा रहे हैं, छह छह लाइन बनाई जा रही है।
और जहां भी देखो शिवर लाइन पड़ी हुई है। हमारे यहां बड़नगर रोड है। जहां पे तीस फुट का रोड था। आज वो रोड जो है एक सौ बीस फुट का हो रहा है। और मेरा मानना है उज्जैन में ऐसा काम हो रहा है कि किसी स्टेट में ऐसा कार्य नहीं हो रहा है। और सबसे बड़ी बात है उनतीस किलोमीटर लंबा घाट बनाया जा रहा है।
जब 2016 की बात मैं करूँ उस समय हमें दिक्कत आई थी स्नान के समय। क्योंकि हमारे यहाँ लाखों की संख्या में संत महात्मा होते हैं, नागा संन्यासी होते हैं, हमारे साथ युवा होते हैं, हमारे साथ भक्तगण होते हैं। अब इतने व्यक्तियों को कहाँ पे स्नान कराया जाए? हमारे पास खाली रामघाट था। लेकिन आज हमारे पास उनतीस किलोमीटर का लंबा घाट है।
और हमें स्नान करने में जो करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएगा, उनको स्नान करने में उज्जैन में कोई तकलीफ नहीं है। और सबसे बड़ी बात है बाबा महाकाल यहां विराजमान है। और जितने भी श्रद्धालु हैं, सब गंगा, छिप्रा स्नान करेंगे। छिप्रा के पश्चात वो महाकाल का दर्शन करेंगे। और हमारे मुख्यमंत्री जी के द्वारा यहां कोई कमी ना हो, पूरा प्रयास किया जा रहा है।
और आपने देखा होगा उज्जैन में यहाँ पे जब साधु संत आते हैं यहाँ कच्चा निर्माण होता है। टेंट सिटी के नाम से जिसको जाना जाता है। लेकिन टेंट सिटी जो है वहाँ पे कच्चा रास्ता होता है और टेंटू में जितने महात्मा हैं वो टेंटू में ही निवास करते हैं। और हम सब का प्रयास है इस बार का जो कुंभ हो दिव्य हो और हम मुख्यमंत्री जी को बहुत- बहुत आशीर्वाद, शुभकामना देना चाहेंगे कि जो आपका प्रयास है वो सफल हो।