उमरिया- बफर जोन में वन्यजीव पर्यटन का बढ़ रहा आकर्षण, 100 दिनों में आए 3780 पर्यटक
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परासी बफर जोन में 550 वाहनों से 2,588 पर्यटक पहुंचे, जबकि पचपेड़ी बफर जोन में 252 वाहनों से 1,192 पर्यटकों ने जंगल सफारी की। दोनों पर्यटन गेट्स पर पर्यटकों की अच्छी उपस्थिति रही। आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 243 वाहनों से 1,109, अगस्त में 265 वाहनों से 1,247 और सितंबर में 168 वाहनों से 780 पर्यटकों ने बफर जोन का भ्रमण किया। वहीं, एक से आठ अक्टूबर तक 126 वाहनों से 644 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे। इस अवधि में अगस्त माह में सर्वाधिक पर्यटक आए।
बांधवगढ़ के बफर जोन में पर्यटकों को बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर मिल रहा है। जंगल की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता पर्यटकों के आकर्षण को बढ़ा रही है। यहां मानव और वन्यप्राणियों के सह-अस्तित्व की झलक भी देखने को मिलती है, जिससे पर्यटक प्रकृति को करीब से जानने और समझने का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचकर वन्यप्राणियों के दीदार के साथ जंगल की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं।
परासी और पचपेड़ी बफर जोन में पर्यटकों को बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों के नियमित दीदार हो रहे हैं, जिससे उनका उत्साह बना हुआ है। बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के संचालन से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। साथ ही, इन गतिविधियों से वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। अक्टूबर से कोर जोन में पर्यटन शुरू होने के बाद भी बफर जोन में जंगल सफारी के प्रति पर्यटकों का उत्साह बरकरार है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उमरिया के बफर जोन में वन्यजीव पर्यटन का बढ़ता आकर्षण, 100 दिनों में 3780 पर्यटक आने से यह क्षेत्र पर्यटक गंतव्य बनता जा रहा है। यह विषय दर्शाता है कि प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र को पर्यटन के साथ जोड़कर आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ कैसे बढ़ाया जा सकता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि संरक्षित क्षेत्र में नियंत्रित पर्यटन से स्थानीय रोजगार सृजन और संरक्षण जागरूकता बढ़ती है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है: स्थानीय लोगों को आय के नए स्रोत मिलते हैं, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती