उन्नाव के संकट मोचन मंदिर में 31वां धनुषभंग कार्यक्रम:जय श्रीराम के जयकारे गूंजे, कलाकारों ने जीवंत किए रामायण प्रसंग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →उन्नाव के शुक्लागंज पोनी रोड तिराहा स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में मंगलवार रात 31वें धनुषभंग और सुंदरकांड कार्यक्रम का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर को खूबसूरती से सजाया गया था और भगवान हनुमान जी का सुंदर श्रृंगार किया गया।
सुंदर झांकियों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के जाने-माने कलाकारों ने अपनी कला दिखाई। कानपुर के कलाकार सुरेश बाबू लिपाठी ने लक्ष्मण जी की भूमिका निभाई, वहीं बांदा के कुलपीप शास्त्री ने परशुराम जी का किरदार निभाया। कलाकारों ने अपने संवाद और अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
धनुषभंग प्रसंग के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने का दृश्य देखकर श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए संवाद का मंचन भी खास रहा। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रद्धालु लगातार ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयकारे लगाते रहे। देखें 3 तस्वीरें...
धार्मिक मंचन के साथ भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने भी माहौल को भक्ति से भर दिया। कलाकारों ने ‘हे दुःख भंजन मारुति नंदन’ और ‘जय हो बजरंग बली’ जैसे भजन गाए। भजनों की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। मंदिर परिसर में घंटियों और जयकारों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक माहौल से भर गया। इस आयोजन के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी से जुड़ी आकर्षक झांकियां दिखाई गईं।
श्रद्धालुओं ने झांकियों के दर्शन कर पूजा की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के आखिर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद खाया। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि मंदिर में धनुषभंग और सुंदरकांड का यह धार्मिक कार्यक्रम लगातार 31 सालों से हो रहा है।
हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं ने उत्साह से हिस्सा लिया और धार्मिक कार्यक्रम का आनंद लिया। इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों और जय श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
उन्नाव के मंदिर में भव्य कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के मन को एकजुट किया, परन्तु भीड़-भाड़ से उत्पन्न दुर्घटनाएँ भी हो सकती हैं। ऐसे समय में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करना, आपातकालीन योजनाएँ बनाना और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना ज़रूरी है। यदि किसी को चोट लगे तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें और पुलिस को सूचित करें। यह अनुभव हमें दिखाता है कि धार्मिक उत्सवों में भी मानवीय सुरक्षा और सहानुभूति को प्राथमिकता देकर समाज को एकजुट और सुरक्षित बनाया जा सकता है।