यूपी के आगरा में ‘समर्थ शिक्षक-सशक्त भारत’ राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया संबोधित
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आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जेपी सभागार में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘समर्थ शिक्षक-सशक्त भारत’ का समापन हो गया। समापन समारोह का शुभारंभ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और एनसीटीई के चेयरपर्सन प्रोफेसर पंकज अरोड़ा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश समेत उत्तरी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 250 से अधिक शिक्षकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षकों को सशक्त बनाने, राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानकों और राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई।
इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का विशेष स्थान रहा है। गुरु-शिष्य परंपरा केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जीवन के मूल्यों को आत्मसात करने और श्रेष्ठ नागरिक बनाने का माध्यम भी रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की महत्वपूर्ण पहल है।
इसमें बच्चों की रुचि, क्षमता और जरूरतों के अनुसार शिक्षा देने के साथ बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को प्राथमिकता दी गई है।
स्पीच: आनंदीबेन पटेल, राज्यपाल, उत्तर प्रदेश
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘समर्थ शिक्षक-सशक्त भारत’ का उद्देश्य शिक्षकों को सशक्त बनाकर शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाना है। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और अन्य उत्तरी राज्यों के शिक्षकों ने भाग लिया, जिससे क्षेत्रीय शैक्षणिक नीतियों पर चर्चा हुई। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए उच्च स्तर की प्रतिबद्धता दर्शाती है, और शिक्षकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक होगा: बेहतर शिक्षण गुणवत्ता से छात्रों के परिणाम सुधरेंगे, जिससे समाज में शिक्षा के