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यूपी के प्रयागराज में स्थित हैं मां के तीन प्रमुख शक्तिपीठ

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
यूपी  के प्रयागराज में स्थित हैं मां के तीन प्रमुख शक्तिपीठ

वीओ - प्रयागराज... त्रिवेणी संगम की इस पावन धरती पर आस्था के ऐसे तीन धाम हैं, जहां मां के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है... मीरापुर में मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी और अलोपीबाग में मां अलोप शंकरी का मंदिर... तीनों शक्तिपीठों की अपनी अलग धार्मिक मान्यताएं, अपनी परंपराएं और अपनी महिमा है... लेकिन मां के प्रति भक्तों की श्रद्धा तीनों जगह एक जैसी है... खासकर नवरात्र के दिनों में इन मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है... दूर-दराज से श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं...

थ्री विन पुजारी - बाइट - गोपाल यादव, पुजारी, मां ललिता देवी मंदिर

बाइट - श्याम पाठक, पुजारी, मां कल्याणी देवी मंदिर

बाइट - यमुनापुरी जी महाराज, प्रबंधक, मां अलोप शंकरी मंदिर (0.45 - 01.11)

वीओ - धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं में प्रयागराज के इन तीनों देवी धामों का विशेष महत्व बताया गया है... मां ललिता देवी मंदिर को 51 शक्तिपीठों की परंपरा से जुड़ा माना जाता है... मान्यता है कि यहां माता सती के हाथ की अंगुलियां गिरी थीं... वहीं, मां कल्याणी देवी मंदिर से जुड़ी स्थानीय लोकमान्यता में माता सती की छह अंगुलियां गिरने की कथा प्रचलित है...

जबकि अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी मंदिर की परंपरा सबसे अलग है... यहां माता की पारंपरिक प्रतिमा के बजाय पवित्र पालने की पूजा की जाती है... मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का दाहिना हाथ या कलाई गिरकर अदृश्य हो गई थी... इसी मान्यता से मंदिर का नाम अलोप शंकरी पड़ा... इन अलग-अलग परंपराओं के बीच एक बात समान है...

मां के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा...

3 विन बाइट - बाइट - श्रद्धालु बाइट - श्रद्धालु

बाइट - श्रद्धालु

वीओ - मां के इन तीनों दरबारों में कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंचता है, तो कोई जीवन में सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करता है... नवरात्र के दौरान मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ जाती है... मां के जयकारों, पूजा-अर्चना और भक्तों की श्रद्धा से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठता है...

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।