UPI पर चार्ज क्यों जरूरी है? देश के सबसे बड़े बैंक SBI के चेयरमैन ने बताया
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आज ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो या किसी को पैसे भेजने हों, यूपीआई हमारी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
ऐसे में अगर यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगाने की बात होती है, तो सबसे पहले यही सवाल उठता है कि जब अब तक ये सुविधा मुफ्त थी, तो अब पैसे क्यों देने पड़ सकते हैं? और आखिर इस चार्ज की जरूरत क्या है?
इसी सवाल पर देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने अपनी बात रखी है.
उन्होंने कहा है कि यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए बैंकों को लगातार तकनीक, सुरक्षा और निगरानी पर पैसा खर्च करना पड़ता है.
ऐसे में चुनिंदा बड़े ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR से इस खर्च को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
चेयरमैन ने ये भी कहा है कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे दुकानदार इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डाल सकें.
चार्ज लगाना क्यों जरूरी है?
यूपीआई से पेमेंट करना हमें भले ही आसान और फ्री लगता हो लेकिन इसके पीछे एक बड़ा डिजिटल सिस्टम काम करता है.
बैंक के सर्वर, पेमेंट प्रोसेसिंग, तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लगातार निवेश करना पड़ता है.
SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी के मुताबिक, SBI अकेले यूपीआई के जरिए हर दिन करीब 40 करोड़ फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन संभालता है.
इतने बड़े पैमाने पर पेमेंट को बिना रुके चलाने और लेनदेन पर नजर रखने के लिए बैंक को लगातार अपनी तकनीक मजबूत करनी पड़ती है.
इसलिए बैंकिंग सेक्टर कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने की वकालत कर रहा है.
सारे यूपीआई पेमेंट पर देना होगा चार्ज?
नहीं, सारे ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा.
इसमें पर्सन-टू-पर्सन पेमेंट को छूट दी गई है. साथ ही साथ 2000 रुपए तक के ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा.
Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, SBI चेयरमैन ने कहा कि प्रस्तावित MDR में करीब 98% ट्रांजैक्शन चार्ज से बाहर ही रहेंगे.
ग्राहकों के लिए क्या होगा?
यूपीआई पर MDR लगाने की चर्चा
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar