राजनीति

UPI चार्ज पर सियासत, सरकार बोली- नहीं था कोई विरोध, कांग्रेस का दावा- कमेटी में नहीं हुई चर्चा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
UPI चार्ज पर सियासत, सरकार बोली- नहीं था कोई विरोध, कांग्रेस का दावा- कमेटी में नहीं हुई चर्चा

यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति तक पहुंच गया.

इस कमेटी में UPI पेमेंट को लेकर हुई चर्चा पर सरकार और विपक्ष अलग-अलग बयान दे रहे हैं.

कांग्रेस ने दावा किया कि इस प्रस्ताव पर वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने चर्चा नहीं की थी.

कांग्रेस के अनुसार, ज् यादातर व्यापारियों को प्रति ट्रांजेक्शन 2,000 रुपए से ज् यादा के यूपीआई पेमेंट पर बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर को यह चार्ज देना होगा.

UPI चार्ज पर नहीं हुई कोई चर्चा: कांग्रेस

सरकार का कहना है कि MDR स्ट्रक्चर को लेकर कमेटी से जो सिफारिश की गई तब कांग्रेस ने असहमति नहीं जताई थी और अब विरोध कर रही है.

इसमें कहा गया कि रिपोर्ट पारित होने के समय पांच कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई असहमति दर्ज नहीं की थी.

वित्त समिति के सदस्य रहे गौरव गोगोई ने एक् स पर एक पोस् ट में कहा कि प्रस्तावित यूपीआई चार्ज पर वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने चर्चा नहीं की थी.

उन्होंने दावा किया कि जब वित्त विभाग के प्रतिनिधि समिति के सदस्यों से मिले थे, तो उन्होंने यूपीआई टैक्स से जुड़ा कोई खास प्रस्ताव समिति के सामने नहीं रखा था.

समिति के सदस्यों ने उठाए थे सवाल: गोगोई

गोगोई ने कहा, 'वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने उस यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की है जिसकी घोषणा मोदी सरकार ने हाल ही में की है.

जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त समिति के सदस्यों से मिले तो उनके पास यूपीआई टैक्स पर कोई खास प्रस्ताव नहीं था.' उन्होंने दावा किया कि समिति के सदस्यों ने एमडीआर की जरूरत पर सवाल उठाए थे, लेकिन चर्चा के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों ने कोई खास या संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

मैं फिर से कहता हूं कि हालिया यूपीआई टैक्स नीतियां छोटे भारतीय व्यापारियों, वेंडर्स और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाएंगी और बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाएंगी.'

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📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

UPI पेमेंट के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर सरकार और विपक्ष के बीच विवाद ने वित्तीय स्थायी समिति तक पहुँच गया है। यह विषय व्यापारियों द्वारा लेनदेन पर लगाई जाने वाली कटौती दर से संबंधित है, जिसे सरकार ने 2,000 रुपये तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि MDR दर में बदलाव से डिजिटल भुगतान के उपयोग पर सीधा असर पड़ेगा और व्यापारियों की आय पर भी असर होगा। यदि दर बढ़ती है तो व्यापारियों के लिए लागत बढ़ेगी, जिससे वे डिजिटल पेमेंट को कम उपयोग कर सकते हैं, वहीं उपभोक्ताओं को अधि

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