UPI MDR पर सरकार का बड़ा प्लान, GST काउंसिल में होगा मंथन
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
सितंबर 24, नई दिल्ली: UPI लेनदेन पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर कारोबारियों और पेमेंट इंडस्ट्री के बीच चल रही चर्चा के बीच सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों को लेकर स्थिति साफ की है। सरकार के मुताबिक, UPI लेनदेन पर उपभोक्ताओं से किसी तरह का MDR नहीं लिया जाएगा।
दरअसल, MDR वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया में मर्चेंट, बैंक और पेमेंट सर्विस से जुड़े पक्षों के बीच लेनदेन के लिए लिया जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई टैक्स या सरचार्ज नहीं है और इससे मिलने वाला शुल्क सरकार के पास नहीं जाता, बल्कि यह पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच होता है।
सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री जल्द ही व्यापारियों के साथ बैठक कर MDR से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकती हैं। इसके अलावा इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी IBA और मर्चेंट बैंकों के साथ भी समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। इसके साथ ही MDR पर GST लगाए जाने या उसकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को GST काउंसिल के सामने रखा जाएगा। वित्त मंत्रालय को भरोसा है कि GST काउंसिल इस पर फैसला लेते समय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखेगी।
सरकार ने दोहराया है कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है।
फ़ाइल फ़ोटो
💡 पृष्ठभूमि (Background)
UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर व्यापारियों और पेमेंट इंडस्ट्री के बीच चर्चा चल रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं से UPI लेनदेन पर कोई MDR नहीं लिया जाएगा, जिससे डिजिटल भुगतान के दौरान उपभोक्ता शुल्क से बचा जा सकेगा। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI भारत का प्रमुख डिजिटल भुगतान माध्यम है और MDR पर निर्णय से व्यापारियों के खर्च और उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार पर असर पड़ेगा। यदि उपभोक्ताओं पर कोई MDR नहीं लगाया जाता, तो वे कम लागत पर लेनदेन कर सकेंगे, जिससे डिजिटल भुगतान का