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उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए दिया मैदानी अमले से नियमित संवाद का मंत्र

लेखक: Sanjida Khanam अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए दिया मैदानी अमले से नियमित संवाद का मंत्र

टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह और निवाड़ी के बॉन्डेड डॉक्टर्स से किया संवाद, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की शत-प्रतिशत पहचान और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश

भोपाल, 4 नवंबर 2026। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच बेहतर बनाने के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह एवं निवाड़ी जिले में पदस्थ बॉन्डेड डॉक्टर्स से संवाद कर मैदानी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुए संवाद में उन्होंने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, सुरक्षित प्रसव और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया।

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर (एमएमआर एवं आईएमआर) में कमी लाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं की नियमित एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की शत-प्रतिशत पहचान और जोखिम के अनुसार उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में समय पर भर्ती एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से लगभग एक सप्ताह पहले उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद और प्रोत्साहन पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता में आशा, एएनएम और अन्य मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। चिकित्सक उनसे नियमित संवाद करें, उनकी समस्याओं और अनुभवों को समझें तथा बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि केवल निर्देश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार भी जरूरी है। मैदानी अमले को सक्रिय कर सूक्ष्म स्तर पर कार्य करने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सकती है।

रोकथाम, नियमित जांच और समय पर उपचार को प्राथमिकता

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि 'प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर' की अवधारणा के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया जाए। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के माध्यम से गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) सहित विभिन्न बीमारियों की समय रहते पहचान कर उपचार शुरू किया जाए। आमजन को स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित खानपान और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।

उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने और मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर नहीं करने के निर्देश दिए। रेफरल केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही उचित स्वास्थ्य संस्थान के लिए किया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में निर्धारित प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा।

बीएमओ और सीएमएचओ करें नियमित मॉनिटरिंग

उपमुख्यमंत्री ने बीएमओ और सीएमएचओ को स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छता, आवश्यक पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता तथा मरीजों को समय पर उपचार देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उन्होंने समय प्रबंधन को भी कार्यक्षमता से जोड़ते हुए कहा कि दायित्वों का बेहतर नियोजन कार्यों की गुणवत्ता और परिणाम सुधारने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। चिकित्सक अपने कार्यों की प्राथमिकताएं तय करें और सेवा के प्रति समर्पण एवं सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें।

डॉक्टर्स ने साझा किए मैदानी अनुभव

संवाद के दौरान टीकमगढ़ जिले के पीएचसी बराना की डॉ. भूमि सक्सेना ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ का अच्छा सहयोग मिलता है और ग्रामीणजन स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट होकर नियमित रूप से केंद्र आते हैं। इसी केंद्र के डॉ. गगन सिंह ने भी अपने कार्यक्षेत्र के अनुभव साझा किए।

निवाड़ी जिले के पीएचसी ओरछा के डॉ. दिव्यांशु ककरे और दमोह जिले के पीएचसी तारादेही के डॉ. धर्मेंद्र यादव ने अपने कार्यक्षेत्र की जानकारी दी। डॉ. यादव ने बताया कि उनके स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन लगभग 25 से 30 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। छतरपुर जिले के पीएचसी गढ़ी मलहरा के डॉ. तनिष्क बिछारिया ने स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की समयबद्ध उपलब्धता और मरीजों को दी जा रही सेवाओं की जानकारी दी।

उपमुख्यमंत्री ने चिकित्सकों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा का अनुभव चिकित्सकों को बेहतर और संवेदनशील डॉक्टर बनने में मदद करता है। सभी चिकित्सक अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और सेवाभाव से करें। उन्होंने सुमन पंचायत के निर्माण के लिए भी युद्ध स्तर पर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, बीएमओ और नवपदस्थ बॉन्डेड डॉक्टर्स शामिल हुए।

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Sanjida Khanam

Sanjida Khanam डिजिटल हिंदी पत्रकारिता के साथ सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में सक्रिय हैं।