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उत्तराखंड: 125 साल पुरानी पौड़ी की रामलीला फिर होगी जीवंत, 126वें मंचन की तैयारी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उत्तराखंड: 125 साल पुरानी पौड़ी की रामलीला फिर होगी जीवंत, 126वें मंचन की तैयारी

एंकर- उत्तराखंड के पौड़ी जिले में 125 साल से अधिक पुरानी रामलीला की परंपरा एक बार फिर मंच पर जीवंत होने जा रही है। कांडई गांव से शुरू हुई रामकथा की यह यात्रा आज पौड़ी शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। वर्ष 1897 में शुरू हुई इस ऐतिहासिक रामलीला का वर्ष 2025 में 125वां मंचन हुआ और अब यह 126वें मंचन की ओर बढ़ रही है।

खास बात यह है कि यहां रामकथा केवल संवाद और अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि शास्त्रीय राग-रागिनियों, लोकधुनों और पारसी थिएटर शैली का अनूठा संगम भी देखने को मिलता है। बदलते दौर में मंच की रोशनी और तकनीक जरूर बदली, लेकिन रामलीला की सांस्कृतिक आत्मा आज भी बरकरार है। आपको बता दें कि कांडई गांव से शुरू हुई रामकथा की यह सांस्कृतिक यात्रा आज पौड़ी की पहचान बन चुकी है।

वर्ष 1897 में शुरू हुई रामलीला ने समय के साथ कई पड़ाव देखे हैं। शुरुआती दौर में भीमल की लकड़ियों और चीड़ के छीलों की रोशनी में रामलीला का मंचन हुआ करता था। इसके बाद लालटेन और फिर बिजली की रोशनी ने मंच को नया स्वरूप दिया। समय बदला, तकनीक बदली, लेकिन रामलीला की परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही।

बाइट : आशुतोष नेगी, संरक्षक, रामलीला कमेटी

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।