उत्तराखंड: 2027-28 में 500 नर्सेज और वार्ड ब्वॉय को विदेश में रोजगार का लक्ष्य
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स्लग- नर्सिंग पाठ्यक्रम और रोजगार
Category- स्वास्थ्य / रोजगार / उच्च शिक्षा
उत्तराखंड: 2027-28 में 500 नर्सेज और वार्ड ब्वॉय को विदेश में रोजगार का लक्ष्य
एंकर- उत्तराखंड में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशिक्षित मेडिकल मानव संसाधन को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में गठित एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग पाठ्यक्रमों के संचालन से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया।
इसके लिए प्राप्त 73 आवेदनों की जांच के बाद छह आवेदन समिति के समक्ष रखे गए, जिनमें से पांच को नर्सिंग पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए योग्य पाया गया। बैठक में मुख्य सचिव ने नर्सिंग पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ का व्यवस्थित डाटा बैंक तैयार करने पर जोर दिया, ताकि मेडिकल मानव संसाधन की आवश्यकता और उपलब्धता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने प्रशिक्षित युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के निर्देश देते हुए वित्तीय वर्ष 2027-28 में 500 नर्सेज और वार्ड ब्वॉय को विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके लिए पश्चिम एशिया, पश्चिमी यूरोप, एस्टोनिया और खाड़ी देशों में रोजगार की संभावनाएं तलाशने को कहा गया।
उन्होंने अस्पतालों में दक्ष और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने और निजी अस्पतालों में प्रति बेड निर्धारित मानकों के अनुसार नर्सिंग स्टाफ व वार्ड ब्वॉय की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उत्तराखंड सरकार ने 2027‑28 में 500 नर्स और वार्ड ब्वॉय को विदेश में रोजगार दिलाने का लक्ष्य रखा है। यह योजना नर्सिंग पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाने और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों को बेहतर नौकरी के अवसर देने के उद्देश्य से बनाई गई है। यह कदम राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि विदेश में काम करने से आय में वृद्धि और पेशेवर अनुभव मिलता है। आम जनता पर इसका असर रोजगार के नए विकल्पों के रूप में सकारात्मक होगा, जिससे युवाओं में स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रति जागरूकता