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उत्तराखंड: भराड़ीसैंण: स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं पहाड़ी व्यंजनों से बढ़ा रहीं आजीविका

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उत्तराखंड:  भराड़ीसैंण: स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं पहाड़ी व्यंजनों से बढ़ा रहीं आजीविका

स्लग- पहाड़ी व्यंजन भराड़ीसैंण

Category- ग्रामीण विकास/महिला सशक्तिकरण

उत्तराखंड: भराड़ीसैंण: स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं पहाड़ी व्यंजनों से बढ़ा रहीं आजीविका

एंकर- उत्तराखंड में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच लोगों का रुझान मोटे पहाड़ी अनाजों और पारंपरिक व्यंजनों की ओर बढ़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पहाड़ी अनाजों और पारंपरिक खानपान को बढ़ावा दे रही हैं। इसका लाभ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी मिल रहा है।

उत्तराखंड के चमोली जिले के गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान विकासखंड के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ग्राम्य विकास विभाग के सहयोग से पहाड़ी व्यंजनों के स्टॉल संचालित कर रही हैं। यहां जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और अधिकारियों को चौंसा, हरी सब्जियां, मंडुवे की रोटी, भंगजीरे की चटनी और मूली की थिच्वाणी सहित कई पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य पहाड़ी खानपान को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत करना है।

बाइट- अनिल सिंह रावत, ब्लॉक मिशन प्रबंधक, स्वयं सहायता समूह, गैरसैंण

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।