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उत्तराखंड: चमोली में लीलियम की खेती बनी स्वरोजगार का जरिया, 50 काश्तकार कर रहे खेती

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उत्तराखंड: चमोली में लीलियम की खेती बनी स्वरोजगार का जरिया, 50 काश्तकार कर रहे खेती

Slug- चमोली में लीलियम की खेती

Category- उद्यान, कृषि, स्वरोजगार, चमोली

उत्तराखंड: चमोली में लीलियम की खेती बनी स्वरोजगार का जरिया, 50 काश्तकार कर रहे खेती

एंकर- उत्तराखंड के चमोली जिले में उद्यान विभाग की पहल से लीलियम की खेती काश्तकारों के लिए स्वरोजगार का नया माध्यम बन रही है। विभाग की ओर से किसानों को लीलियम के बल्ब उपलब्ध कराने के साथ ही खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। वर्तमान में जिले के करीब 50 काश्तकार लीलियम की खेती कर रहे हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक भोपाल सिंह राणा ने भी उद्यान विभाग की योजना के तहत दो हजार से अधिक लीलियम के बल्ब लगाए। करीब तीन महीने में फसल तैयार होने के बाद अब इसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है।

बाइट- भोपाल सिंह राणा, काश्तकार

💡 पृष्ठभूमि (Background)

चमोली जिले में लीलियम की खेती एक नया स्वरोजगार का माध्यम बनकर उभरी है। उद्यान विभाग ने किसानों को बल्ब उपलब्ध कराकर और खेती के तरीकों की जागरूकता बढ़ाकर इस पहल को आगे बढ़ाया है। यह कदम किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक कृषि में आय अस्थिर रहती है। लीलियम की मांग फूल उद्योग और सजावटी पौधों के बाजार में लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमतें मिल सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी घटेगी और आर्थिक स्थिरता में सुधार होगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।