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उत्तराखंड: दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए उन्नत प्रजातियां विकसित कर रहा पंतनगर विश्वविद्यालय

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उत्तराखंड: दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए उन्नत प्रजातियां विकसित कर रहा पंतनगर विश्वविद्यालय

स्लग- दलहन उत्पादन बढ़ाने में जुटा पंतनगर विश्वविद्यालय

Category- कृषि / अनुसंधान

उत्तराखंड: दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए उन्नत प्रजातियां विकसित कर रहा पंतनगर विश्वविद्यालय

एंकर- देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया है। इसी दिशा में उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर जिले में स्थित पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और शोधार्थी उन्नत, रोगरोधी और अधिक पैदावार देने वाली दलहन प्रजातियां विकसित करने में जुटे हैं।

इसका उद्देश्य किसानों की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और दालों के आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत में पिछले वर्ष 274 लाख टन दलहन उत्पादन के बावजूद घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 50 लाख टन दालों का आयात करना पड़ा। ऐसे में वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन बढ़ाकर 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में उड़द, मूंग और अरहर की उन्नत प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का प्रयास ऐसी किस्में विकसित करना है, जो रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक लाभ दे सकें।

बाइट- डॉ. एस.के. वर्मा, निदेशक शोध, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।