अपराध

उत्तराखंड: दीपावली पर उल्लुओं की तस्करी रोकने के लिए वन विभाग अलर्ट

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उत्तराखंड: दीपावली पर उल्लुओं की तस्करी रोकने के लिए वन विभाग अलर्ट

दीपावली के त्योहार पर वन विभाग अलर्ट मोड पर है। अंधविश्वास के चलते कुछ लोग आज भी उल्लुओं को पकड़ते हैं और तंत्र साधना के लिए उल्लुओं की बलि देते हैं। अंधविश्वास और तस्करी के इस खेल पर लगाम लगाने के लिए इस बार वन विभाग पूरी तरह मुस्तैद नज़र आ रहा है। कालसी की DFO संदीपा शर्मा ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उल्लू एक पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित प्रजाति है।

इसका शिकार करना, इसे घर में कैद रखना, या इसका किसी भी तरह से अवैध व्यापार करना कानूनन एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि उल्लुओं की तस्करी को रोकने के लिए जंगलों, बाज़ारों, और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी दल तैनात कर दिए गए हैं। वहीं, ज्योतिषाचार्य कमलेश शास्त्री के अनुसार, शास्त्रों में उल्लू को माँ लक्ष्मी का वाहन यानी सवारी माना गया है।

लोक मान्यता है कि जिसे दीपावली की रात उल्लू के दर्शन हो जाएं, उसके घर सुख-समृद्धि और माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।

बाइट 1- संदीपा शर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी कालसी

बाइट 2- कमलेश शास्त्री, ज्योतिषाचार्य

💡 पृष्ठभूमि (Background)

उल्लू की तस्करी पर वन विभाग का अलर्ट दीपावली के दौरान अंधविश्वास के चलते उल्लुओं को पकड़कर बलि देने की प्रथा को रोकने के लिए है। यह विषय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उल्लुओं के कानूनी संरक्षण को उजागर करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तस्करी से न केवल प्रजातियों का विनाश होता है, बल्कि यह अवैध व्यापार को भी बढ़ावा देता है। आम जनता पर असर यह हो सकता है कि लोगों को अंधविश्वास से हटकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत महसूस होगी, और वन विभाग की निगरानी से वन्यजीवों की सुरक्षा में सुधार होगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।