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उत्तराखंड: पितृपक्ष में बद्रीनाथ धाम पहुंच रहे श्रद्धालु, ब्रह्म कपाल में कर रहे पिंडदान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
उत्तराखंड: पितृपक्ष में बद्रीनाथ धाम पहुंच रहे श्रद्धालु, ब्रह्म कपाल में कर रहे पिंडदान

बद्रीनाथ धाम केवल भगवान विष्णु की आराधना का प्रमुख केंद्र ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इसी वजह से बद्रीनाथ धाम को ‘मोक्ष धाम’ की संज्ञा दी जाती है। पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अलकनंदा के तट स्थित ब्रह्म कपाल में अपने पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करते हैं।

यहां अपने पितृों को तर्पण देने पहुंचे लोकेश शर्मा का कहना है कि पितृों की आत्मा की शांति और उनकी सद्गति की कामना लेकर यहां आए हैं। ब्रह्म कपाल में पिंडदान करने के बाद मन को संतोष और शांति का अनुभव हो रहा है। वहीं, ब्रह्मकपाल के पुजारी मदन कोठियाल का कहना है कि मान्यता है कि यहां पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से उनकी सद्गति और मोक्ष की कामना पूरी होती है।

बाइट 1- लोकेश शर्मा, श्रद्धालु, देहरादून

बाइट 2- मदन कोठियाल, पुजारी, ब्रह्मकपाल

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।