उत्तराखंड: उत्तरकाशी में धान की कटाई शुरू
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उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी के खेतों में इन दिनों रौनक लौट आई है। पहाड़ की पारंपरिक खेती और ग्रामीण जीवन से जुड़ा धान कटाई का सीजन शुरू हो चुका है। उत्तरकाशी के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खेतों में धान की कटाई का दौर शुरू हो गया है। पुरोला की लाल घाटी में तैयार हो रही लाल धान की फसल अपनी अलग पहचान रखती है।
किसानों के लिए खेतों में खड़ी यह फसल छह महीने की मेहनत, उम्मीद और इंतजार का परिणाम है। मुख्य कृषि अधिकारी एसएस वर्मा ने बताया कि एक ही तरह की फसल लगातार लगाने से उत्पादन में कमी आ सकती है। काश्तकारों को बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करवानी चाहिए, ताकि मिट्टी की स्थिति के अनुसार फसल और पोषक तत्वों का चयन किया जा सके।
उनका कहना है कि किसानों को बुवाई से लेकर फसल उत्पादन तक वैज्ञानिक और जैविक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। वहीं सहायक कृषि अधिकारी अनिल नौटियाल ने बताया कि बेमौसमी बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में धान की फसल खराब हुई है, जबकि कई क्षेत्रों में उपज अच्छी देखने को मिल रही है।
विभाग की ओर से काश्तकारों को बुवाई के समय जैविक कृषि और बेहतर कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। काश्तकार भीम सिंह रावत ग्राम उड़री ने बताया कि आज काश्तकारों की छह माह की पकी हुई फसल को एकत्रित करने में जुटे है। लाल धान की मांग देश-विदेशों में भी है।
बाइट 1- एसएस वर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी
बाइट 2- अनिल नौटियाल, सहायक कृषि अधिकारी
बाइट 3-भीम सिंह रावत, काश्तकार, उड़री