वैभव सूर्यवंशी को नहीं खिलाने पर भड़के पूर्व क्रिकेटर, कहा- 'मेरी पत्नी भी चिल्ला रही थी'
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वैभव सूर्यवंशी अफगानिस्तान के खिलाफ पहले मैच में नहीं खेले, आज दूसरे टी20 में भी उनका खेलना मुश्किल नजर आ रहा है.
ऐसे में पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं, उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट 15 वर्षीय बल्लेबाज के साथ ठीक नहीं कर रहा. उन्होंने संजू सैमसन को लेकर कहा कि उन्हें उन पर दया आती है.
वैभव सूर्यवंशी जिम्बाब्वे के खिलाफ हुई पिछली टी20 सीरीज में सर्वश्रेष्ठ प्लेयर चुने गए थे, लेकिन फिर भी उन्हें ड्राप कर दिया गया.
संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने ओपन किया, अभिषेक ने शानदार पारी खेली लेकिन संजू फ्लॉप (10) रहे.
पूर्व क्रिकेटर के श्रीकांत ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि अफगानिस्तान के खिलाफ वैभव नहीं खेल रहे हैं, उन्होंने टीवी से मैच हटा दिया और मूवी देखने लगे.
उन्होंने अपनी पत्नी से जुड़ा किस्सा भी बताया कि वह भी चिल्लाने लगी थी.
श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर बताया कि जैसे ही प्लेइंग 11 आई, उनकी पत्नी भी गुस्से में चिल्लाने लगी.
उन्हें नहीं लगा था कि जिम्बाब्वे के खिलाफ प्लेयर ऑफ द सीरीज बनने के बाद भी उन्हें ड्राप किया जाएगा.
'मैच छोड़कर फिल्म देखने लगा'
श्रीकांत ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला कि वैभव नहीं खेल रहे हैं, वह मैच हटाकर फिल्म देखने लग गए. उन्होंने कहा, "वैभव सूर्यवंशी के साथ सही नहीं हो रहा.
अगर वह अगले मैच में खेलता है तो सोचेगा कि रन नहीं किए तो ड्राप कर दिया जाएगा. आप गलत संदेश दे रहे हो, और भी खिलाड़ियों के मन में शक पैदा कर रहे हो.
उन्होंने दलीप ट्रॉफी, टी20 इंटरनेशनल, आईपीएल और इंडिया-ए के लिए भी स्कोर किया, आपको चाहिए कि उसे प्रमोट किया जाए."
'संजू सैमसन पर दया आती है'
उन्होंने आगे कहा, "टीम मैनेजमेंट संजू सैमसन के साथ भी खेल रहा है. सैमसन पर तो दया आती है.
या तो उन्हें अधिक मौके दिए जाएं या ड्राप कर दें या वैभव को भी ड्राप किए बिना कई मच खेलने दें." उन्होंने कहा कि दोनों को इधर-उधर जो 2-2 मैच मिल रहे हैं वो खिलाड़ी के लिए भी अच्छा
📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर वैभव सूर्यवंशी के टी20 मैचों में खेलने से वंचित रहने और पूर्व भारतीय क्रिकेटर के टीम प्रबंधन पर सवाल उठाने के इर्द-गिर्द घूमती है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युवा प्रतिभा का सही उपयोग न होने से राष्ट्रीय टीम की प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ सकता है। अगर प्रबंधन खिलाड़ियों की जरूरतों को अनदेखा करता है, तो इससे टीम के अंदर असंतोष और प्रदर्शन में गिरावट हो सकती है। आम जनता को यह समझना चाहिए कि खेल प्रशासन की नीतियों का खिलाड़ियों के मनोबल और टीम की सफलता पर गहरा असर पड़ता है।