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वाशिंगटन से आई ऐसी खबर, हिल गयी मोदी सरकार! रूस के साथ भारत का बरसो पुराना रिश्ता खत्म होगा?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
वाशिंगटन से आई ऐसी खबर, हिल गयी मोदी सरकार! रूस के साथ भारत का बरसो पुराना रिश्ता खत्म होगा?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) ने 'लिंडसे ओ.

ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026' को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक प्रस्ताव पारित कर दिया है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार देगा, जो रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीदारी जारी रखे हुए हैं।

इस सूची में भारत और चीन जैसे बड़े आयातक प्रमुखता से शामिल हैं। मंगलवार शाम को निचले सदन में इस बिल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन पार्टी का साथ दिया। इस क्रॉस-वोटिंग ने डेमोक्रेटिक नेतृत्व को चौंका दिया और प्रस्ताव 214-211 के बेहद करीबी अंतर से पारित हो गया।इसे भी पढ़ें: गद्दारी करने वाले बांग्लादेश के लिए भारत ने दबाया बिजली का बटन, ढाका में हाहाकार रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल और कई अन्य कानूनों को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को 214-211 वोटों से मंज़ूरी मिली।

इस नतीजे ने हाउस के डेमोक्रेटिक नेतृत्व को चौंका दिया। सोमवार को, हाउस की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य और डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स ने बिल का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि इससे राष्ट्रपति ट्रंप को बिना किसी रोक-टोक के टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार मिल जाएगा।इसे भी पढ़ें: 5000 पर 20 और 10000 पर कटेंगे 40 रुपए, सरकार ने UPI पर MDR को लेकर क्या नया ऐलान कर दिया, जानिए आम लोगों पर क्या होगा असर पिछले महीने, US सीनेट ने 86-11 के अंतर से इस बिल को मंज़ूरी दी थी।

यह कानून न केवल रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है, बल्कि उन जहाज़ों के "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है जो तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मॉस्को की मदद करते हैं। US का मानना ​​है कि रूस का कच्चा तेल व्यापार यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए फ़ंड जुटाने में मदद कर रहा है।

यह बिल ट्रंप को रूस के प्रमुख तेल व्यापारिक साझेदारों, जिनमें चीन और भारत शामिल हैं, पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देने की भी कोशिश करता है। 7 अगस्त को सीनेट द्वारा पारित बिल के वर्शन में रूस के व्यापारिक साझेदारों का नाम नहीं लिया गया है, बल्कि तेल और गैस के वॉल्यूम के हिसाब से सबसे बड़े पाँच आयातकों का ज़िक्र किया गया है।

यह वोटिंग ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन-समर्थक समूहों ने वाशिंगटन में लॉबिंग की कोशिशें तेज़ कर दी हैं। 'अमेरिकन कोएलिशन फ़ॉर यूक्रेन' द्वारा आयोजित 'यूक्रेन एक्शन समिट' चल रही है, जिसका मकसद US सांसदों पर कीव को लगातार समर्थन देने के लिए दबाव डालना है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस बिल को हाउस से मंज़ूरी मिलनी ज़रूरी है।

हाउस गुरुवार से अपनी शुरुआती छुट्टी शुरू करने वाला है और उम्मीद है कि मध्यावधि चुनावों के बाद 9 नवंबर को फिर से इसकी बैठक होगी। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi

📡 स्रोत: NewsData.io

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