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अब विदेश से आएगा आटा, तेल, सोयाबीन और मक्का, सूखे से देश के हालात बुरे!

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
अब विदेश से आएगा आटा, तेल, सोयाबीन और मक्का, सूखे से देश के हालात बुरे!

कारोबारी साल 2026-27 में भारत खाने-पीने की तमाम चीजों के साथ-साथ पशु चारे और कृषि क्षेत्र से जुड़े कच्चे माल का आयात बढ़ा सकता है. द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है.

दरअसल, इस साल सूखे की संकट के बीच फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. इससे घरेलू स्तर पर आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

सूखे ने बढ़ाई टेंशन

रिपोर्ट के मुताबिक, सोयाबीन और मूंगफली खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें हैं.

कमजोर मानसून से इन्हें नुकसान पहुंचने से देश के भीतर खाद्य तेलों और पशु-आहार की भारी किल्लत हो गई है. ऐसे में आने वाले समय में खाद्य तेल का आयात बढ़ सकता है.

अब चूंकि मक्का और सोयाबीन मील जैसे पशु चारे के दाम बढ़े हैं, तो इसका बुरा असर डेयरी और पोल्ट्री उद्योग पर पड़ा है. इससे आम उपभोक्ताओं के लिए अंडे, दूध और चिकन की कीमतें बढ़ गई हैं.

पोल्ट्री फीड बनाने वाली कंपनियां सोयाबीन मील और मक्का आयात करने की अनुमति मांग रही हैं और कपड़ा निर्माता कपास पर आयात शुल्क हटाने की मांग कर रहे हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टार्च उद्योग को इस बात की चिंता है कि अगर मक्के का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में चला जाता है, तो चीन से स्टार्च के आयात की जरूरत बढ़ सकती है.

इन्हीं सब चिंताओं के बीच सर्दियों में होने वाली सरसों की फसल को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है.

सोयाबीन पर क्या है संकट?

सोयाबीन की फसलों पर मौसम की दोहरी मार पड़ी है.

पिछले साल अत्यधिक और बेमौसम बारिश के कारण पकी हुईं फसलें खेतों में ही सड़ गई थीं.

वहीं, अब इस वित्तीय वर्ष (FY 2026-27) में मानसून की बेरुखी ने मराठवाड़ा, विदर्भ, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के सोयाबीन बेल्ट में फसलों को नुकसान पहुंचाया है.

कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने 'द इकोनॉमिक टाइम्स' को बताया कि उद्योग जगत ने सरकार से 3 मिलियन टन सोयाबीन मील (सोयाबीन की खली) के आयात की अनुमति मांगी है.

पोल्ट्री फीड में सोयाबीन मील और मक्के की हिस्से

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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