विदिशा : राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026-27, विज्ञान की सोच के साथ समाधान प्रस्तुत करने में विदिशा के बाल वैज्ञानिकों ने दिखाई प्रतिभा
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प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने-अपने विज्ञान प्रोजेक्ट एवं नवाचारों को पीपीटी के माध्यम से निर्णायक मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने विज्ञान की सोच के साथ विभिन्न समस्याओं को समझने तथा उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया। निर्णायक मंडल द्वारा विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं समाधान की उपयोगिता के आधार पर जूनियर एवं सीनियर वर्ग के विजेताओं का चयन किया गया।
जिला समन्वयक सुरेश पाटिल एवं अकादमिक प्रभारी तथा राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के नवागत जिला कोऑर्डिनेटर विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जूनियर वर्ग में ट्रिनिटी कान्वेंट की अनंत जैन ने प्रथम स्थान, साकेत एमजीएम की नामिनी व्यास ने द्वितीय स्थान तथा ट्रिनिटी कान्वेंट के आर्य अग्रवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इसी प्रकार सीनियर वर्ग में ट्रिनिटी कान्वेंट की अवनी माहेश्वरी ने प्रथम स्थान, साकेत एमजीएम की इसीका शाक्य ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सीनियर वर्ग में स्प्रिंगफील्ड के अभिषेक कुमार एवं ओलंपिस स्कूल के लक्ष्य पटेल ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतियोगिता के समापन अवसर पर जूनियर एवं सीनियर वर्ग के विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। साथ ही प्रतियोगिता में सहभागिता करने वाले अन्य छात्र-छात्राओं एवं मार्गदर्शी शिक्षकों को भी प्रमाण-पत्र वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। चयनित विद्यार्थी आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में विदिशा जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य स्तर पर चयनित होने के पश्चात विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने का अवसर मिलेगा।
वैज्ञानिक सोच के साथ समाधान की क्षमता जरूरी
कार्यक्रम में एसएटीआई कॉलेज के प्रोफेसर के.के. पंजाबी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों में केवल विज्ञान की जानकारी होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सोच के साथ समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 10 से 17 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इस प्रकार के जिला स्तरीय आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए।
विद्यालय के प्राचार्य खजान सिंह ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं उनके मार्गदर्शी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ नए विचारों और नवाचारों के लिए प्रेरित करती हैं।
सेवानिवृत्त प्राचार्यों सहित विशेषज्ञों ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में सेवानिवृत्त प्राचार्य सुधा पावर, आर.के. जैन, के.सी. अहिरवार, वी.के. जैन एवं आर.पी. गुप्ता, एसएटीआई कॉलेज के प्रोफेसर के.के. पंजाबी तथा प्रोफेसर सचिन महाजन शामिल रहे। निर्णायकों द्वारा विद्यार्थियों के विज्ञान प्रोजेक्ट एवं प्रस्तुतियों का विभिन्न मापदंडों के आधार पर मूल्यांकन कर विजेताओं का चयन किया गया।
जिला समन्वयक सुरेश पाटिल ने बताया कि विदिशा जिले में पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। जिले के छात्र-छात्राएं पूर्व में भी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर विदिशा जिले का नाम रोशन कर चुके हैं।
जिला कोऑर्डिनेटर विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा एवं नवाचार को मंच प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर चयनित विद्यार्थी अब राज्य स्तर की प्रतियोगिता में विदिशा का प्रतिनिधित्व करेंगे तथा राज्य स्तर पर चयन होने पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
समापन अवसर पर डीईओ कार्यालय के अधिकारी द्वारा जूनियर एवं सीनियर वर्ग के विजेता विद्यार्थियों के साथ-साथ सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं एवं मार्गदर्शी शिक्षकों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में जिला कोऑर्डिनेटर विजय कुमार श्रीवास्तव ने निर्णायक मंडल के सदस्यों, प्रतिभागी विद्यार्थियों, मार्गदर्शी शिक्षकों, मीडिया प्रभारी एवं कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त किया।