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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया समझौता

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया समझौता

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग-डीएसटी ने अनुसंधान, विकास और नवाचार-आरडीआई कोष के अंतर्गत बेंगलुरु की कंपनी क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इसके अंतर्गत कंपनी को 105 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि 300 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य भारत के क्वांटम सुरक्षित और सेंसिंग नेटवर्क के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी को विकसित करना है। इससे भारत को अपनी प्रौद्योगिकी प्रणाली विकसित करने, विभिन्न तकनीकों को एकीकृत करने और उनकी उपयोगिता का सत्यापन करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने बताया कि यह वित्तीय सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण यानी ओसीडी के माध्यम से दी जाएगी। मंत्रालय के अनुसार डिजिटल बुनियादी ढांचे के बीच बढ़ते परस्पर संपर्क के दौर में संचार की गोपनीयता महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गई है। क्वांटम प्रौद्योगिकियां साइबर सुरक्षा, संचार, नौवहन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगी।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

क्वांटम तकनीक पर आधारित सुरक्षित संचार और सेंसिंग नेटवर्क के विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने बेंगलुरु स्थित कंपनी क्यूएनयू लैब्स के साथ 105 करोड़ रुपये का समझौता किया है। यह कदम भारत की स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी को तेज करने के उद्देश्य से है, जो 300 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली परियोजना का हिस्सा है। इस पहल से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्वांटम संचार में प्रतिस्पर्धी बनना संभव होगा। आम जनता के लिए इसका प्रभाव सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन, बेहतर स्वास्थ्य और पर्यावरण निगरानी तथा उ

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।