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विरोध-प्रदर्शन के तरीकों को लेकर केंद्र सरकार बनाए SOP, दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब; 16 अक्तूबर को होगी सुनवाई

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
विरोध-प्रदर्शन के तरीकों को लेकर केंद्र सरकार बनाए SOP, दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब; 16 अक्तूबर को होगी सुनवाई

Delhi Protest Standard Operating Procedure: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (13 अक्टूबर, 2026) को केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रैफिक और कारोबार में रुकावट को रोकने और प्रदर्शनों को रेगुलेट करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) लागू करने की मांग की गई थी.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने केंद्र के वकील और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से निर्देश लेने को कहा और वकील ऋषभ सक्सेना, एक व्यापारी संगठन और स्ट्रीट वेंडर संतोष कुशवाहा की याचिका को शुक्रवार (16 अक्टूबर, 2026) के लिए लिस्ट किया.

कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस बीच हम प्रतिवादियों को इस मामले में निर्देश लेने का निर्देश देते हैं.

कोर्ट ने वकील अंशिका त्रिपाठी की उस याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर बंद करने को चुनौती दी गई थी.

लोगों को दिक्कत आई याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील सचिन पुरी और संजय पोद्दार ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से कारोबारी गतिविधियों में रुकावट आ रही है और कोर्ट से आग्रह किया कि वह निर्देश दे कि प्रदर्शन तय जगहों पर ही हों ताकि प्रोफेशनल्स और कारोबार पर असर ना पड़े.

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ मामले में पुलिस कमिश्नर को विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक रेगुलेटरी सिस्टम बनाने का निर्देश दिया था.

इन निर्देशों के बाद प्रदर्शनों के लिए कुछ ज़रूरी शर्तें तय की गईं, जिनमें ट्रैफिक, ऑफिस के गेट और मुख्य सड़कों को ब्लॉक करने पर रोक शामिल थी.

लगातार हो रहा विरोध प्रदर्शनों में इजाफा याचिका में आगे कहा गया है कि 12 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे जब वह एक प्रोफेशनल काम के सिलसिले में नई दिल्ली के बाराखंभा रोड पर सक्षम अधिकारी के ऑफिस जा रहे थे, तो उन्होंने मंडी हाउस गोलचक्कर के पास लोगों की भीड़ देखी जो सड़क और सेंट्रल ट्रैफिक आइलैंड पर जमा थे.

याचिका में कहा गया कि 12.10.2026 की घटना कोई अकेली घटना नहीं है.

इससे पहले 01.01.2022 और 12.10.2026 के बीच भी जंतर-मंतर पर कम से कम 82 बड़े आंदोलन हुए, जिनमें से कई धरने एक महीने से ज़्यादा समय तक चले और संसद की ओर मार्च करने की कोशिशें भी हुईं.

प्रेस रिपोर्टों से पता चलता है कि इस जगह पर विरोध-प्रदर्शनों की कुल संख्या बढ़ रही है.

जनवरी और मार्च 2025 के बीच 292 विरोध-प्रदर्शन हुए, जबकि 2024 की इसी अवधि में 202 प्रदर्शन हुए थे.

हफ़्तों तक चलने वाले धरने, मार्च और आस-पास की सड़कों पर फैलने वाली भीड़, देखने में ही ‘स्टैंडिंग ऑर्डर’ की शर्तों के खिलाफ़ लगती है.

कथित मारपीट की जांच एसआईटी से कराने की मांग विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) को लागू करने की मांग वाली याचिकाओं के अलावा, कोर्ट ने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष विनोद झाखड़ की एक याचिका पर भी सुनवाई की.

इस याचिका में 10 अक्टूबर को CEC के इस्तीफ़े की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा आम लोगों के साथ कथित मारपीट की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से कराने की मांग की गई थी.

याचिका में इसमें शामिल लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ़ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने वकील अंशिका त्रिपाठी की याचिका पर भी सुनवाई की.

इस याचिका में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर बंद करने को चुनौती दी गई थी और मेट्रो स्टेशन बंद होने और रेल सेवाओं में रुकावट जैसी कथित परेशानियों पर चिंता जताई गई थी.

राजधानी को किले में बदल दिया गया यहां पर बता दें कि 10 अक्टूबर को, सुरक्षा बलों ने नियोजित विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी को किले में बदल दिया और बड़े पैमाने पर सख्ती बरती। इस दौरान 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया, जंतर-मंतर के पास इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं.

दिल्ली आने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए.

इसके अलावा, दक्षिणपंथी समूहों ने कई प्रदर्शनकारियों की पिटाई की, मुख्य सड़कों पर स्पाइक स्ट्रिप्स (नुकीले अवरोधक) बिछा दिए, हज़ारों पीले बैरिकेड लगाकर ट्रैफिक जाम कर दिया और लाउडस्पीकर लगाकर गैर-कानूनी जमावड़े के खिलाफ पुलिस की पहले से रिकॉर्ड की गई चेतावनियां बजाईं.

📡 स्रोत: NewsData.io

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