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याद है 8 नवंबर की वो शाम? जब रातोंरात बंद हुए थे बड़े नोट, पूरे हुए नोटबंदी के 10 साल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
याद है 8 नवंबर की वो शाम? जब रातोंरात बंद हुए थे बड़े नोट, पूरे हुए नोटबंदी के 10 साल

8 नवंबर 2016 की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक संबोधन ने पूरे देश में खलबली मचा दी थी.

इस दौरान उन्होंने कहा था कि उसी आधी रात से 500 और 1000 रुपये के मौजूदा नोट कानूनी रूप से अमान्य हो जाएंगे. उनके ऐसा कहने के बाद ही पूरे देश में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई.

टीवी पर अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि जिनके पास 500 या 1000 रुपये के पुराने नोट हैं, कि वे 10 नवंबर 2016 से लेकर 30 दिसंबर 2016 तक इन नोटों को बैंक या पोस्ट ऑफिस में अपने अकाउंट में जमा करवा दें.

इसके बाद से बैंकों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगने लगी थीं. करीब 50 दिनों तक अफरा-तफरी सा माहौल रहा. आज उसी नोटबंदी का एक दशक पूरा हो रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि इन 10 सालों के दरमियान क्या कुछ बदला है?

आइए जानते हैं.

86% नोट हो गए थे बंद

नोटबंदी के ऐलान भर से उस वक्त चलन में रहीं कुल करेंसी के 86% रातोंरात बंद हो गए थे.

रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय 15.44 लाख करोड़ मूल्य के नोट चलन में थे.

इनमें से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के रूप में लगभग 13.27 लाख करोड़ रातों-रात अमान्य घोषित कर दिए गए थे.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, इसी दौरान इन प्रतिबंधित नोटों का 99.3% हिस्सा बैंकों में वापस लौट आया था, जिससे यह साबित हुआ कि लगभग पूरा पैसा सिस्टम के दायरे में आ गया.

10 सालों में और क्या-क्या हुआ?

नोटबंदी के इन दस सालों में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले लोगों की संख्या में दोगुना उछाल आया.

बैंकिंग सिस्टम में 99.3% नोट वापस आने की वजह से लोगों की अघोषित आय (Unaccounted Money) सिस्टम के दायरे में आ गई. इससे सरकार का टैक्स कलेक्शन और रेवेन्यू बेस काफी मजबूत हुआ.

इन दस सालों में म्यूचुअल फंड्स और शेयर बाजार निवेश में भी तेजी देखने को मिली.

अब लोग पहले के मुकाबले कैश जमा रखने के बजाय उसे म्यूचुअल फंड (SIP), शेयर बाज

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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