युद्ध के बीच सस्ता हुआ तेल, जितना फ्यूल बन रहा, उतना बिक क्यों नहीं रहा?
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ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में इस महीने तेजी आई है, लेकिन यह भी 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना हुआ है.
यह हैरान करने वाली बात इसलिए है क्योंकि इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के चलते होर्मुज (Strait of Hormuz) और लाल सागर से खाड़ी देशों का एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है.
प्राइस रिपोर्टिंग एजेंसी Argus (आर्गस) के मुताबिक, पश्चिम एशिया के उत्पादकों से क्रूड ऑयल का शिपमेंट अब लगभग 11 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) है, जबकि सात महीने पहले ईरान में जंग का आगाज होने से पहले यह 18 मिलियन bpd था.
गल्फ देशों से सप्लाई में गिरावट
रिस्टैड एनर्जी के चीफ इकोनॉमिस्ट क्लाउडियो गैलिम्बर्टी ने कहा कि 30 अगस्त को लड़ाई फिर से शुरू होने से पहले हफ्ते में होर्मुज से लगभग 8 से 9 मिलियन bpd तेल की सप्लाई हो रही थी, जो इससे पिछले हफ्ते के मुकाबले दोगुनी थी.
गैलिम्बर्टी ने कहा कि हालांकि तब से सप्लाई गिरकर अब 2 मिलियन bpd से भी कम रह गई है.
हालांकि, डेली मूविंग एवरेज अभी भी लगभग 4 से 5 मिलियन बैरल है, जिससे ब्रेंट की कीमत 95 डॉलर के 'उचित' स्तर पर बनी हुई है.
इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, अभी रोजाना एक्सपोर्ट 6 से 8 मिलियन बैरल के बीच है.
क्यों अब तक 100 डॉलर पर नहीं पहुंचा क्रूड?
बेशक तनाव की वजह से खाड़ी देशों से होने वाला कुल निर्यात युद्ध से पहले के 18 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) से घटकर लगभग 11 मिलियन bpd रह गया है, लेकिन होर्मुज से होकर सप्लाई पूरी तरह से बंद नहीं हुई है.
अमेरिका और ईरान में तनातनी के बीच अभी भी इस रास्ते से औसतन 4 से 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल का फ्लो बना हुआ है.
कमोडिटी डेटा फर्म्स के अनुसार, यह निरंतरता बाजार को पैनिक (अफरातफरी) में आने से रोक रही है.
चीन का भी है योगदान
कच्चे तेल की कीमत इसलिए भी 100 डॉलर के पार नहीं पहुंच सकी है क्योंकि इसके पीछे चीन में इसकी घटती मांग जिम्मेदार है.
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातक चीन में आर्थिक सुस्ती और तेल की घटती मांग ने कीमतों को काबू में रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है.
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar