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यूपीः काशी में मां विशालाक्षी का प्राचीन धाम, दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है काशी यात्रा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
यूपीः काशी में मां विशालाक्षी का प्राचीन धाम, दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है काशी यात्रा

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के साथ मां विशालाक्षी देवी मंदिर का भी विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि माता सती के कुंडल जिस स्थान पर गिरे थे, वहीं मां विशालाक्षी का मंदिर स्थापित है। विशालाक्षी का अर्थ है विशाल नेत्रों वाली देवी। मंदिर में प्राचीन प्रतिमा अनादि काल से स्थापित है।

वर्ष 1971 में शंकराचार्य ने पुरानी प्रतिमा के आगे एक नई प्रतिमा की स्थापना कराई। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां विशालाक्षी ने शंकराचार्य को स्वप्न में नई प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया था। आज भी प्राचीन प्रतिमा नई प्रतिमा के पीछे विराजमान है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के पूर्व और दक्षिणी कोने की ओर स्थित है।

मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु मां विशालाक्षी के दर्शन जरूर करते हैं। ऐसा माना जाता है कि मां के दर्शन के बिना काशी की यात्रा अधूरी रहती है।

बाइट- कन्हैया दुबे, मंदिर महंत के पुत्र बाइट- श्रद्धालु

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।