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यूपीः काशी का मणिकर्णिका घाट जहां मृत्यु के बाद मोक्ष की है मान्यता, जानें पौराणिक महत्व

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
यूपीः काशी का मणिकर्णिका घाट जहां मृत्यु के बाद मोक्ष की है मान्यता, जानें पौराणिक महत्व

वाराणसी के हृदय में स्थित मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान शिव मृतात्माओं को तारक मंत्र देकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसी वजह से काशी में मृत्यु को भी आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। घाट पर दिन-रात जलती चिताएं जीवन की नश्वरता का एहसास कराती हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती का मणिकर्ण कुंडल यहां गिरा था, जिसके कारण इस स्थान का नाम मणिकर्णिका पड़ा। एक अन्य मान्यता के मुताबिक, भगवान विष्णु ने यहां हजारों वर्षों तक तपस्या की थी। उनके पसीने से एक कुंड बना, जिसे मणिकर्णिका कुंड या चक्रपुष्कर्णी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती के आगमन के दौरान माता का कुंडल इसी कुंड में गिर गया था।

मणिकर्णिका घाट काशी के पंचतीर्थों में शामिल है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पंचकोशी यात्रा में भी इसका विशेष महत्व है।

बाइट- लक्ष्मण पांडे, स्थानीय कुंड के पुजारी

बाइट- श्रद्धालु

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।